मधेपुरा स्थित ग्रीनफील्ड इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव कारखाने ने अत्याधुनिक रेल इंजन निर्माण के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कारखाने में देश के सबसे शक्तिशाली 12 हजार हॉर्स पावर क्षमता वाले 650वें इलेक्ट्रिक इंजन का निर्माण पूरा हो गया। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इस इंजन को भारतीय रेल की पटरी पर रवाना किया गया।
650वें इंजन को कारखाने के सीनियर सेक्शन इंजीनियर इलेक्ट्रिकल नवल किशोर कुमार, एल्सटॉम के साइट एमडी अशोक कुमार सिंह और इंडस्ट्रियल डायरेक्टर अशोक कुमार ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर कारखाने और इंजन को आकर्षक ढंग से सजाया गया था।
कारखाना प्रबंधन के अनुसार, इसी महीने चार और इलेक्ट्रिक इंजन तैयार होकर भारतीय रेल के बेड़े में शामिल होंगे। भारतीय रेल और फ्रांस की कंपनी एल्सटॉम के बीच हुए करार के तहत मार्च 2028 तक 12 हजार हॉर्स पावर के कुल 800 इलेक्ट्रिक इंजन तैयार किए जाने हैं। 650वें इंजन के निर्माण के बाद अब शेष 150 इंजनों के निर्माण पर काम तेज कर दिया गया है।
2020 में पहली बार मालगाड़ी में लगा था इंजन
मधेपुरा कारखाने में निर्मित 12 हजार हॉर्स पावर का पहला इलेक्ट्रिक इंजन 18 मई 2020 को पहली बार मालगाड़ी में लगाया गया था। इस इंजन ने 118 डिब्बों वाली मालगाड़ी को पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर से झारखंड के बरवाडीह तक खींचा था। करीब छह हजार टन तक के रेक को खींचने में सक्षम यह इंजन अधिकतम 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है।
यात्री ट्रेन में भी हुआ इस्तेमाल
मधेपुरा में निर्मित इस शक्तिशाली इंजन का इस्तेमाल यात्री ट्रेन में भी किया जा चुका है। ललितग्राम-सहरसा-पटना राज्यरानी एक्सप्रेस में इसका परिचालन किया गया। भारत विश्वस्तरीय तेज इलेक्ट्रिक इंजन तैयार करने वाले देशों में शामिल है। 10 अप्रैल 2018 को मधेपुरा में निर्मित पहले इलेक्ट्रिक इंजन का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।
इन इंजनों की अनुमानित आयु करीब 35 वर्ष है। 501वें से 800वें इंजन तक के 300 इंजनों का रखरखाव गुजरात के साबरमती डिपो में किया जाएगा, जबकि अन्य इंजनों का मेंटेनेंस सहारनपुर और नागपुर डिपो में होगा।






