बिहार के बांका जिले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला परिषद कार्यालय में छापेमारी कर एक इंजीनियर समेत दो कर्मियों को ₹1 लाख 26 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद जिला परिषद कार्यालय में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार, जिला परिषद की एक योजना पर कार्य कर रहे संवेदक अवध बिहारी ने निगरानी विभाग से शिकायत की थी कि कार्य के भुगतान और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत में जिला परिषद अध्यक्ष राजेंद्र यादव, जूनियर इंजीनियर सुधीर कुमार, कर्मी जागेश्वर मंडल, इंजीनियर ओमप्रकाश मंडल सहित पांच लोगों के नाम शामिल किए गए थे।
शिकायत मिलने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने पूरे मामले का सत्यापन कराया। जांच के दौरान रिश्वत मांगने के आरोप सही पाए गए। इसके बाद निगरानी विभाग ने योजनाबद्ध तरीके से जिला परिषद कार्यालय में जाल बिछाया। जैसे ही रिश्वत की राशि का लेन-देन हुआ, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कर्मी जागेश्वर मंडल और इंजीनियर ओमप्रकाश मंडल को ₹1 लाख 26 हजार की रिश्वत राशि के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
कार्रवाई के दौरान निगरानी विभाग की टीम ने जिला परिषद अध्यक्ष राजेंद्र यादव से भी पूछताछ की। मामले में अन्य आरोपितों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। निगरानी विभाग का कहना है कि यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
निगरानी विभाग के डीएसपी सत्येंद्र राम ने बताया कि शिकायत के सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई थी, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई। गिरफ्तार दोनों आरोपियों को भागलपुर स्थित निगरानी न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
इस कार्रवाई को बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है। निगरानी विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी योजनाओं में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।





