बक्सर में सूखे की मार: धान की रोपनी ठप, सूख रहे बिचड़े, किसान बोले– खेत प्यासे, व्यवस्था बेबस


बिहार का बक्सर जिला इस बार भीषण सूखे की चपेट में है। कभी धान उत्पादन के लिए मशहूर यह इलाका आज पानी की भारी किल्लत से जूझ रहा है। बारिश नहीं होने और नहरों में पानी नहीं पहुंचने से धान की रोपनी लगभग ठप है। खेतों में दरारें पड़ गई हैं, बिचड़े सूख रहे हैं और किसान सरकार से तत्काल राहत की मांग कर रहे हैं।
जिले के 11 प्रखंडों में करीब 2 लाख 22 हजार पंजीकृत किसान हैं। इस खरीफ सीजन में 1 लाख 7 हजार हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक महज 6 प्रतिशत रोपनी ही हो सकी है। किसानों ने रोहिणी नक्षत्र में धान की नर्सरी तैयार की थी और आर्द्रा नक्षत्र में बारिश व नहरों के पानी का इंतजार किया, लेकिन दोनों ने ही साथ नहीं दिया।

लालगंज कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवकरण सिंह बताते हैं कि धान की नर्सरी तैयार होने के 25 से 30 दिनों के भीतर रोपाई जरूरी होती है। समय पर रोपाई नहीं होने से पैदावार पर गंभीर असर पड़ेगा। कई जगह बिचड़े खेतों में ही सूखने लगे हैं।
किसानों में भारी नाराजगी है। कुल्हड़िया गांव के किसान डॉ. सुरेश यादव का कहना है कि इस बार प्रकृति के साथ-साथ प्रशासन ने भी किसानों को निराश किया है। वहीं लालबिहारी गोंड़ बताते हैं कि 14 बीघा जमीन होने के बावजूद एक कट्ठा में भी रोपनी नहीं हो सकी।
बरसात में लबालब रहने वाली महदह-सिकरौल नहर भी इस बार सूखी पड़ी है। महदह पंचायत के मुखिया सुशील यादव का कहना है कि जब नहर में ही पानी नहीं है तो खेतों तक सिंचाई कैसे होगी।

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