बिहार के बगहा स्थित वाल्मीकिनगर से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। भारत-नेपाल सीमा पर किंग कोबरा का सफल रेस्क्यू करने के बाद मशहूर स्नेक रेस्क्यूअर जानकी देवी को उसी सांप ने डंस लिया। उन्हें तुरंत नेपाल के त्रिवेणी मिलिट्री कैंप अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के बाद उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। जानकी देवी को इलाके में ‘स्नेक लेडी’ के नाम से जाना जाता है।
घटना वाल्मीकिनगर के बिसही गांव की है, जहां स्थानीय निवासी मुनि लाल के घर में एक विशाल किंग कोबरा घुस आया था। सूचना मिलते ही स्नेक रेस्क्यूअर जानकी देवी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने पूरी सावधानी और अनुभव के साथ किंग कोबरा का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया। इसी दौरान वाल्मीकिनगर वन विभाग की प्रशिक्षित टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई थी।
रेस्क्यू पूरा होने के बाद जानकी देवी किंग कोबरा को गले में लपेटकर फोटो खिंचवा रही थीं। तभी अचानक सांप ने उनके हाथ पर डंस लिया। मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में उन्हें नेपाल के त्रिवेणी स्थित मिलिट्री कैंप अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू किया। समय पर इलाज मिलने से उनकी हालत अब स्थिर और खतरे से बाहर है।
घटना के बाद वन विभाग की टीम ने किंग कोबरा को अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित रूप से वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व के घने जंगल में छोड़ दिया। वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार ने लोगों से अपील की कि बरसात के मौसम में जहरीले सांप अक्सर सुरक्षित और सूखी जगह की तलाश में रिहायशी इलाकों में पहुंच जाते हैं। ऐसे में लोग खुद सांप पकड़ने की कोशिश न करें, बल्कि तुरंत वन विभाग को सूचना दें ताकि प्रशिक्षित टीम सुरक्षित तरीके से उनका रेस्क्यू कर सके।
जानकी देवी का साहस पूरे इलाके में मिसाल माना जाता है। उन्होंने महज 12 साल की उम्र से सांपों का रेस्क्यू शुरू किया था और अब तक हजारों जहरीले सांपों को सुरक्षित बचा चुकी हैं। उन्हें पहले भी 50 से अधिक बार सांप काट चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने वन्यजीव संरक्षण और लोगों की सुरक्षा का अपना अभियान नहीं छोड़ा। यह घटना एक बार फिर बताती है कि साहस के साथ-साथ वन्यजीवों के साथ हर पल सतर्कता बरतना भी बेहद जरूरी है।







