बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि जन सुराज पार्टी और प्रशांत किशोर की राजनीतिक साख की सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है। 2025 विधानसभा चुनाव में खाता तक नहीं खोल पाने वाली जन सुराज अब खुद प्रशांत किशोर को मैदान में उतारकर बड़ा दांव खेल रही है।
2025 के विधानसभा चुनाव में जन सुराज ने 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन 236 सीटों पर जमानत जब्त हो गई। बांकीपुर में पार्टी की उम्मीदवार वंदना कुमारी को सिर्फ 7,717 वोट मिले, जबकि भाजपा के नितिन नबीन ने 98 हजार से अधिक वोट हासिल कर 52 हजार वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी।
इस बार प्रशांत किशोर खुद चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि उन्हें उम्मीद थी कि राजद, कांग्रेस और वाम दल उनका समर्थन करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। राजद ने एक बार फिर रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बना दिया है। दूसरी ओर अभिनेता और पूर्व सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने प्रशांत किशोर का समर्थन किया है, जिससे कायस्थ वोटों पर कुछ असर पड़ने की चर्चा है।
बांकीपुर में जातीय समीकरण बेहद अहम माने जाते हैं। यहां कायस्थ और अति पिछड़ा वर्ग के मतदाता बड़ी संख्या में हैं। भाजपा ने भी कायस्थ समाज से आने वाले अभिषेक कुमार को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा का दावा है कि विकास कार्यों और संगठन की मजबूती के दम पर सीट फिर उसके खाते में जाएगी।
वहीं प्रशांत किशोर स्थानीय समस्याओं, अधूरे विकास और बदलाव के मुद्दे को लेकर लगातार जनता के बीच सक्रिय हैं। जन सुराज का कहना है कि इस बार बांकीपुर की जनता भाजपा को जवाब देगी और बदलाव का मौका देगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रशांत किशोर विपक्ष के साझा उम्मीदवार होते तो मुकाबला अधिक दिलचस्प हो सकता था। लेकिन अकेले दम पर भाजपा के मजबूत गढ़ में जीत हासिल करना उनके लिए आसान नहीं होगा।
अब सबकी नजर बांकीपुर पर है, जहां यह उपचुनाव तय करेगा कि प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति में नई ताकत बनकर उभरते हैं या फिर 2025 की तरह उन्हें एक और बड़ा चुनावी झटका लगता है।






