ईरान में भारत का खास संदेश! खामेनेई के अंतिम संस्कार में बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन क्यों बने देश की पसंद?


ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यस्तताओं के चलते भारत ने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा। सबसे अधिक चर्चा इस बात की रही कि इस अहम मौके पर बिहार के राज्यपाल को ही क्यों चुना गया?
विशेषज्ञों के मुताबिक यह फैसला केवल संवैधानिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की संतुलित और रणनीतिक विदेश नीति का संकेत है। सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं और पश्चिम एशिया, इस्लामिक समाज तथा राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के गहरे जानकार माने जाते हैं। कश्मीर में चिनार कोर की कमान संभालने के साथ-साथ वे वर्षों से सामरिक विषयों पर लेखन और विश्लेषण करते रहे हैं।

सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर प्रवीण कुमार के अनुसार हसनैन के चयन के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं—उनका व्यापक सैन्य अनुभव, इस्लामिक दुनिया की समझ और वर्तमान में उनका संवैधानिक पद। उनका मानना है कि हसनैन भारत की रणनीतिक सोच और बहुलतावादी पहचान का प्रभावी प्रतिनिधित्व करते हैं।

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राजनीति शास्त्र के शिक्षक डॉ. वीसी झा का कहना है कि किसी राष्ट्राध्यक्ष के अंतिम संस्कार में प्रतिनिधिमंडल भेजना केवल प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों और भविष्य की साझेदारी का संदेश भी होता है। राज्यपाल और विदेश राज्य मंत्री की संयुक्त मौजूदगी ने यह स्पष्ट किया कि भारत ने इस अवसर को सम्मानजनक और संतुलित प्रतिनिधित्व के रूप में लिया।

भारत और ईरान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, धार्मिक और व्यापारिक संबंध रहे हैं। ऊर्जा सुरक्षा, चाबहार बंदरगाह और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर दोनों देशों की साझेदारी आज भी महत्वपूर्ण है। ऐसे समय में हसनैन की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के साथ-साथ पुराने मित्र देशों के साथ रिश्तों को भी बराबर महत्व देता है।

करीब चार दशक तक सेना में सेवा देने वाले सैयद अता हसनैन को परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल और अति विशिष्ट सेवा मेडल सहित कई सम्मान मिल चुके हैं। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी वे राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक मामलों के प्रमुख विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। यही अनुभव उन्हें इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय अवसर पर भारत का स्वाभाविक प्रतिनिधि बनाता है।

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