भागलपुर। बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भागलपुर में शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों को उनकी पूर्णकालिक सेवा की मांग पर जल्द पहल करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार की जा रही है और जल्द ही इस दिशा में काम किया जाएगा। मंत्री के आश्वासन के बाद अनुदेशकों में अपनी मांग पूरी होने की उम्मीद जगी है।
दरअसल, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी एमएलसी चुनाव से संबंधित जनसभा को संबोधित करने भागलपुर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने एमएलसी प्रत्याशी डॉ. एनके यादव के पक्ष में मतदान करने की अपील की। जनसभा के दौरान शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों की करीब 80 सदस्यीय टीम ने उनसे मुलाकात कर अपनी समस्याओं और मांगों को सामने रखा।
अंशकालिक से पूर्णकालिक सेवा करने की मांग
शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशक भागलपुर इकाई के अध्यक्ष अभय मिश्रा के नेतृत्व में पहुंचे अनुदेशकों ने शिक्षा मंत्री का अंगवस्त्र और फ्रेम भेंट कर स्वागत किया। इसके बाद अपनी मांगों से संबंधित आवेदन सौंपा। अनुदेशकों ने अंशकालिक सेवा को पूर्णकालिक करने की मांग दोहराते हुए सरकार से इस दिशा में जल्द ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।
इस मौके पर मंच पर मौजूद वर्तमान एमएलसी डॉ. एनके यादव, भाजपा की बिहार प्रदेश महामंत्री डॉ. प्रीति शेखर, भाजपा विधायक रोहित पांडे और भाजपा जिला अध्यक्ष संतोष कुमार ने भी अनुदेशकों की समस्याओं की ओर शिक्षा मंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने मांगों के समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया।
SOP तैयार होने के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
अनुदेशकों की मांगों पर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने मंच से आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस विषय को लेकर एसओपी तैयार की जा रही है और जल्द ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जनसभा के बाद मीडिया से बातचीत में मंत्री ने कहा कि सभी लोग उनसे मिले हैं और सरकार एक-एक करके सभी के काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सभी की मनोकामनाओं को सिद्ध करने का नाम ही एनडीए है।
फिलहाल, शिक्षा मंत्री के आश्वासन के बाद शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों को सकारात्मक निर्णय की उम्मीद है। अब उनकी नजर एसओपी तैयार होने और सरकार की ओर से होने वाली अगली कार्रवाई पर टिकी है। हालांकि, पूर्णकालिक सेवा को लेकर अंतिम निर्णय और उसके क्रियान्वयन की प्रतीक्षा बनी हुई है।





