कैमूर जिले के भगवानपुर थाना क्षेत्र के जलई बाग गांव से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। गांव के युवक भगवती कुमार उर्फ गोलू का आईआईटी में चयन होने के बाद पूरे गांव में जश्न का माहौल है। गांव पहुंचते ही महिलाओं ने उनकी आरती उतारी, तिलक लगाया और मिठाई खिलाकर इस उपलब्धि का स्वागत किया। ग्रामीण पारंपरिक गीत गाकर अपनी खुशी जाहिर करते नजर आए।
भगवती का गांव बेहद सुदूर इलाके में है, जहां न स्कूल है और न ही आंगनबाड़ी केंद्र। शुरुआती पढ़ाई के लिए उन्हें दूसरे गांव जाना पड़ा। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने जिला मुख्यालय से इंटर पास किया। इसके बाद पटना में तैयारी की, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर राजस्थान के कोटा जाकर मेहनत जारी रखी और आखिरकार आईआईटी में जगह बना ली।
इस सफलता के पीछे पूरे परिवार का बड़ा त्याग छिपा है। पिता बुटन राम बेंगलुरु में निजी नौकरी करते हैं। बेटे की पढ़ाई में कोई बाधा न आए, इसलिए वे लगातार दो साल तक घर नहीं लौटे और अपनी कमाई का अधिकांश हिस्सा घर भेजते रहे।
मां मीना देवी ने भी बेटे का सपना पूरा करने के लिए स्वयं सहायता समूह से डेढ़ लाख रुपये का कर्ज लेकर कोटा की कोचिंग फीस जमा की। आज भी वे उस कर्ज का ब्याज चुका रही हैं। वहीं बड़ी बहन श्रीदेवी ने अपने मेडिकल की तैयारी छोड़ दी ताकि परिवार की पूरी ताकत छोटे भाई की पढ़ाई पर लग सके।
पोते की सफलता पर दादा शिव मूरत और दादी लाली देवी की आंखें खुशी से नम हो गईं। उनका कहना है कि भगवती पूरे गांव का पहला इंजीनियर बनने जा रहा है और उन्हें भरोसा है कि अब परिवार की गरीबी दूर होगी।
भगवती का सपना आईआईटी बॉम्बे से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना है। उन्होंने बताया कि बचपन में पिता को खराब पंखा ठीक करते देखकर उनके मन में इंजीनियर बनने की इच्छा जगी थी। अब उनका लक्ष्य एक सफल इंजीनियर बनकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करना और गांव का नाम रोशन करना है।






