भोजपुर जिले के आरा से एक ऐसी खबर सामने आई है, जहां भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद उन्हें इंसाफ दिलाने की लड़ाई के साथ-साथ उनकी याद को स्थायी बनाने की भी पहल शुरू हो गई है। शाहपुर प्रखंड के बिलौटी गांव में जिस स्थान पर 17 जून 2026 को पुलिस एनकाउंटर में भरत भूषण तिवारी की मौत हुई थी, उसी जगह बसाई जा रही जवइनिया विस्थापितों की नई बस्ती का नाम उनके नाम पर रखने की मांग तेज हो गई है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मौके पर एक बड़ा बोर्ड लगाया है, जिस पर लिखा है— “आपका बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा”। बोर्ड पर भरत भूषण तिवारी की तस्वीर, 17 जून 2026 की तिथि और प्रस्तावित नाम “शहीद भरत नगर जवइनिया” भी अंकित किया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि भरत भूषण तिवारी हमेशा स्थानीय लोगों की समस्याओं और मिट्टी भराई जैसी मांगों को लेकर आवाज उठाते थे। उनका दावा है कि इन्हीं मुद्दों के संघर्ष के दौरान उनकी जान चली गई। स्थानीय निवासी उमेश कुमार ने कहा कि भरत तिवारी लोगों के लिए संघर्ष करने वाले व्यक्ति थे, इसलिए नई बस्ती का नाम उनके नाम पर रखा जाना चाहिए।
जानकारी के मुताबिक, जवइनिया गांव के विस्थापित परिवारों के लिए बिलौटी में करीब 74 आवास आवंटित किए गए हैं। इन्हीं आवासों वाली नई बस्ती को “भरत नगर” नाम देने की मांग की जा रही है। स्थानीय निवासी अनिल कुमार ने सरकार से इस नाम को आधिकारिक मंजूरी देने और भरत तिवारी द्वारा उठाई गई मांगों को पूरा करने की अपील की है।
इस पहल का बोर्ड युवा परिवर्तन फाउंडेशन, शाहपुर (भोजपुर) की ओर से लगाया गया है। हालांकि, प्रशासन ने अभी तक इस नामकरण को कोई आधिकारिक स्वीकृति नहीं दी है।
गौरतलब है कि 17 जून को हुए पुलिस एनकाउंटर में भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई थी। पुलिस का दावा है कि उन्होंने फायरिंग की थी, जिसके जवाब में आत्मरक्षा में गोली चलाई गई। वहीं, परिजनों का आरोप है कि हथियार फेंकने के बाद भी उन्हें गोली मारी गई। घटना का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसे लेकर मामले पर विवाद और जांच की मांग लगातार जारी है।





