खगड़िया जिले की रानी सकरपुरा पंचायत स्थित अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। वर्ष 1987 में बने इस स्वास्थ्य केंद्र पर आठ गांवों की आबादी निर्भर है, जहां प्रतिदिन 70 से 80 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन अस्पताल का भवन अब खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।
अस्पताल में छह कमरे हैं, जिनमें से केवल एक ही सुरक्षित स्थिति में बचा है। बाकी पांच कमरे जर्जर होकर टूट रहे हैं। डॉक्टर आवास के सभी छह कमरे भी रहने लायक नहीं बचे हैं। इसके बावजूद यहां प्रसव सेवा के साथ टीबी, मलेरिया, फाइलेरिया, कालाजार और एनीमिया जैसी बीमारियों का इलाज जारी है।
स्थिति इतनी खराब है कि दीवारों और छतों से लगातार प्लास्टर और सीमेंट गिरता रहता है। बरसात के दिनों में डिलीवरी रूम, लेबर रूम और दवा भंडारण कक्षों में पानी रिसता है, जिससे दवाओं और जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित रखना चुनौती बन जाता है।
अस्पताल की सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है। पिछले डेढ़ साल से यहां पानी की सुविधा ठप है। परिसर में बनी नल-जल योजना की टंकी भी बेकार पड़ी है। चहारदीवारी नहीं होने के कारण नल चोरी हो जाते हैं और पानी की व्यवस्था बाधित रहती है। एएनएम प्रेमलता कुमारी ने बताया कि सुरक्षा के अभाव में स्वास्थ्यकर्मी खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।
डॉक्टर विभा कुमारी ने कहा कि भवन की जर्जर स्थिति के कारण हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। कई बार प्रसव के दौरान ऊपर से सीमेंट गिरने की घटनाएं हुई हैं, जिससे नवजात शिशुओं की सुरक्षा चुनौती बन जाती है।
मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। हाल ही में डॉक्टर और नर्स की अनुपस्थिति में सफाईकर्मी द्वारा प्रसव कराए जाने की बात भी सामने आई है।
अस्पताल प्रभारी डॉ. सुशांत सौरव और सिविल सर्जन डॉ. रमेंद्र कुमार ने भी माना कि स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति दयनीय है। अधिकारियों का कहना है कि भवन मरम्मत और पेयजल समस्या के समाधान के लिए विभाग को कई बार पत्र भेजा गया है। अब ग्रामीणों और स्वास्थ्यकर्मियों को इंतजार है कि आखिर इस बदहाल स्वास्थ्य केंद्र की तस्वीर कब बदलेगी।






