बिहार की राजधानी पटना से सटे मसौढ़ी अनुमंडल के नदौल गांव की बेटी संध्या केसरी ने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर 70वीं बीपीएससी परीक्षा के पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर मिसाल कायम की है। बिना किसी कोचिंग या ट्यूशन के केवल सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन माध्यम से तैयारी करने वाली संध्या का चयन ग्रामीण विकास पदाधिकारी (RDO) के पद पर हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ पूरे इलाके में खुशी का माहौल है।
संध्या के पिता संतोष कुमार गांव में एक छोटी किराना दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उन्होंने बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। संध्या ने वर्ष 2019 में 10वीं और 2021 में 12वीं की परीक्षा पीपी स्कूल से उत्तीर्ण की। इसके बाद वर्ष 2024 में स्नातक पूरा करते ही उन्होंने बीपीएससी की तैयारी शुरू की और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली।
बीपीएससी का परिणाम घोषित होते ही गांव में जश्न का माहौल बन गया। पीपी शैक्षणिक समूह के चेयरमैन डॉ. अभिराम सिंह ने कहा कि संध्या की सफलता पूरे विद्यालय परिवार के लिए गर्व का विषय है। वहीं एकेडमिक डायरेक्टर अक्षय आनंद ने कहा कि साधारण परिवार से आने वाली संध्या ने यह साबित कर दिया कि सफलता के लिए मेहनत और लगन सबसे बड़ा आधार है।
संध्या के पिता संतोष कुमार ने भावुक होकर कहा कि उनकी बेटी शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रही है। उसने घर पर रहकर ऑनलाइन माध्यम और सेल्फ स्टडी से तैयारी की तथा पहली ही कोशिश में बीपीएससी जैसी कठिन परीक्षा पास कर ली। उन्होंने कहा कि बेटी की इस उपलब्धि पर पूरे परिवार को गर्व है।
संध्या की सफलता के बाद उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि बिना महंगी कोचिंग और बड़े शहर का रुख किए संध्या ने जो उपलब्धि हासिल की है, वह ग्रामीण परिवेश की बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है।






