पटना में जमीन खरीदना हुआ और महंगा! सर्किल रेट बढ़ने से एक कट्ठा जमीन की सरकारी कीमत 2.18 करोड़ रुपये तक पहुंची

पटना: बिहार सरकार ने जमीन और मकान की रजिस्ट्री के लिए निर्धारित न्यूनतम मूल्य यानी सर्किल रेट (एमवीआर) में बड़ा बदलाव किया है। नई दरों के लागू होने के बाद राजधानी पटना का रियल एस्टेट बाजार चर्चा का विषय बन गया है। कई शहरी और व्यावसायिक क्षेत्रों में सर्किल रेट लगभग दोगुना, जबकि कुछ इलाकों में ढाई गुना तक बढ़ा दिया गया है।

सबसे अधिक असर पाटलिपुत्र, बोरिंग रोड, कंकड़बाग, राजीव नगर और हनुमान नगर जैसे प्रमुख इलाकों पर पड़ा है। यहां एक कट्ठा जमीन की सरकारी कीमत 1.09 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.18 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। वहीं शहर के 12 प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में मुख्य सड़क किनारे जमीन का सर्किल रेट 2.50 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा निर्धारित किया गया है।

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नई दरों का सीधा असर रजिस्ट्री शुल्क और स्टांप ड्यूटी पर पड़ेगा, क्योंकि संपत्ति की खरीद-बिक्री में इन्हीं सरकारी मूल्यों को आधार बनाया जाता है। आवासीय क्षेत्रों में भी जमीन की सरकारी कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे घर और प्लॉट खरीदने वालों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

रियल एस्टेट विशेषज्ञ बिन्नू कुमार के अनुसार, इस फैसले से सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी, लेकिन आम लोगों के लिए जमीन खरीदना और मुश्किल हो सकता है। उनका कहना है कि 2014 के बाद पहली बार इतनी बड़ी वृद्धि की गई है, जिससे शहरी क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

रियल एस्टेट कारोबारी रॉबिन कुमार का मानना है कि बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार सुविधाओं के कारण बिहार के विभिन्न जिलों के लोग पटना में बसना चाहते हैं। ऐसे में बढ़े हुए सर्किल रेट का सबसे अधिक असर मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अन्य शहरों में भी बेहतर सुविधाएं और नए टाउनशिप विकसित करे तो राजधानी पर बढ़ता दबाव कम हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सर्किल रेट बढ़ने से सरकार को राजस्व लाभ होगा, लेकिन आम लोगों के लिए आवासीय संपत्ति पहले से अधिक महंगी हो जाएगी। आने वाले समय में इसका असर जमीन की बिक्री, फ्लैट निर्माण और रियल एस्टेट निवेश पर साफ दिखाई दे सकता है।

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