सहरसा जिले के धमसेना गांव में उस समय हर किसी की आंखें नम हो गईं, जब नेपाल के विराटनगर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का शिकार हुए प्रिंस यादव का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट ले जाया गया। युवा बेटे की अंतिम विदाई के दौरान पूरे गांव में मातम का माहौल देखने को मिला। परिजन, रिश्तेदार और ग्रामीण गमगीन माहौल में अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
इस बीच चर्चित कोचिंग विवाद मामले में हाल ही में जमानत पर रिहा हुए ज्ञान बिंदु कोचिंग के निदेशक रौशन आनंद भी अपने गांव पहुंचे। छोटे भाई प्रिंस यादव के पार्थिव शरीर को देखते ही वह खुद को संभाल नहीं सके। बताया जा रहा है कि अंतिम दर्शन के दौरान रौशन आनंद कई बार भावुक होकर बेहोश हो गए। भाई के प्रति उनका लगाव और अचानक हुए इस दुखद हादसे ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है।
अंतिम यात्रा के दौरान मौजूद लोगों ने बताया कि परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। एक ओर छोटे भाई की अर्थी उठ रही थी, तो दूसरी ओर बड़े भाई की हालत देखकर हर किसी की आंखें भर आईं। गांव के लोग लगातार परिवार को ढांढस बंधाने में जुटे रहे।
परिजनों का कहना है कि हाल के दिनों में हुए घटनाक्रमों के कारण पूरा परिवार मानसिक तनाव से गुजर रहा था। परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते उचित राहत और न्याय मिला होता तो शायद आज यह स्थिति नहीं बनती। हालांकि प्रिंस यादव की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका खुलासा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा।
मृतक के ममेरे भाई रमन यादव ने कहा कि यदि रौशन आनंद को पहले जमानत मिल गई होती तो शायद यह दुखद दिन नहीं देखना पड़ता। उन्होंने प्रिंस यादव की संदिग्ध मौत की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
परिवार ने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई है। वहीं प्रिंस यादव की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, शुभचिंतक और समाज के लोग शामिल हुए। धमसेना गांव समेत आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर व्याप्त है।
संवाददाता : इन्द्रदेव जी, सहरसा





