केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आदेश जारी कर औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ताओं द्वारा पेट्रोल पंपों से बड़े पैमाने पर पेट्रोल-डीजल खरीदने पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह आदेश प्रारंभिक तौर पर 90 दिनों के लिए लागू रहेगा।
सरकार के अनुसार हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पन्न भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट का असर वैश्विक पेट्रोलियम आपूर्ति श्रृंखला और शिपिंग व्यवस्था पर पड़ा है। इसके कारण देश के कुछ हिस्सों में पेट्रोल और डीजल की मांग में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई। जांच में पाया गया कि रिटेल और बल्क कीमतों में बड़े अंतर के कारण कई औद्योगिक एवं व्यावसायिक उपभोक्ता पेट्रोल पंपों से ही ईंधन खरीद रहे थे।
पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी “मोटर स्पिरिट एवं हाई स्पीड डीजल (रिटेल आउटलेट्स के जरिए आपूर्ति का अस्थायी विनियमन) आदेश-2026” के तहत अब बड़े उपभोक्ताओं को अपनी आवश्यकता के अनुसार ईंधन थोक बिक्री केंद्रों या अधिकृत उपभोक्ता पंपों से खरीदना होगा। रिटेल पेट्रोल पंपों से केवल वाहनों के फ्यूल टैंक अथवा पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) द्वारा अनुमोदित कंटेनरों में ही ईंधन दिया जाएगा।
नए नियम के अनुसार एक ग्राहक या वाहन को प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर डीजल ही उपलब्ध कराया जाएगा और इस ईंधन का पुनर्विक्रय पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। सरकार का कहना है कि यह कदम आम नागरिकों, परिवहन सेवाओं और आवश्यक सेवाओं के लिए पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
केंद्र ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश का सख्ती से पालन कराने, जमाखोरी, कालाबाजारी और अनधिकृत खरीद पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। नियमों के उल्लंघन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।






