बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में कदाचार, पेपर लीक और भ्रष्टाचार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। शनिवार को सरदार पटेल भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में EOU के डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लो ने बताया कि बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और प्रश्नपत्र लीक के मामलों की जांच में बड़ी प्रगति हुई है।
डीआईजी ने बताया कि सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) प्रतियोगिता परीक्षा-2026 में पेपर लीक और कदाचार से जुड़े पांच मामले मुंगेर, नालंदा, वैशाली, बेगूसराय और नवादा जिलों में दर्ज किए गए थे। इन मामलों की जांच EOU द्वारा की जा रही है, जिसमें अब तक 35 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।
इसके अलावा सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी प्रतियोगिता परीक्षा-2026 में कदाचार के मामले में दो अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। इस प्रकार दोनों परीक्षाओं से जुड़े मामलों में कुल 37 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बायोमेट्रिक सत्यापन का कार्य करने वाली जयपुर की मेसर्स साई एजुकेयर प्राइवेट लिमिटेड के कई कर्मचारी इस पूरे नेटवर्क में शामिल थे। कंपनी के जिला समन्वयक, सुपरवाइजर और ऑपरेटरों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। कई कर्मचारी स्वयं परीक्षा के अभ्यर्थी थे, जबकि नियमों के अनुसार उन्हें ऐसी स्थिति की घोषणा करनी थी। कुछ कर्मियों का आपराधिक इतिहास होने के बावजूद उनका सत्यापन भी नहीं कराया गया था।
EOU ने कंपनी द्वारा अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए उसे ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव तैयार किया है। वहीं ब्लूटूथ और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए नकल कराने के मामलों में जैमर सेवा देने वाली कंपनी ECIL के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
डीआईजी ने बताया कि आगामी NEET UG-2026 पुनर्परीक्षा और सिपाही भर्ती परीक्षा को लेकर विशेष निगरानी तंत्र बनाया गया है। इसके लिए EOU ने एक विशेष कोषांग और नई SIT का गठन किया है, जो संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखेगी। साथ ही भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों में कई अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई जारी है।






