धनबाद जिले के टुंडी क्षेत्र में हाथियों की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग और जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। जंगलों में हाथियों के एक बड़े झुंड की मौजूदगी के कारण विभाग लगातार निगरानी कर रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की जान-माल की क्षति को रोका जा सके और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
जिला वन पदाधिकारी (डीएफओ) विकास पालीवाल ने बताया कि कुछ दिन पहले गिरिडीह क्षेत्र से करीब 25 से 30 हाथियों का झुंड टुंडी के जंगलों में पहुंचा है। वर्तमान में यह झुंड टुंडी के ऋषिभीटा क्षेत्र के वन क्षेत्रों में विचरण कर रहा है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष हाथियों का यह दल टुंडी और तोपचांची के जंगलों में आता है और कई सप्ताह तक यहां रहता है।
वन विभाग के अनुसार हाथियों के गांवों की ओर बढ़ने से किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। हालांकि ऐसे मामलों में राज्य सरकार की ओर से प्रभावित किसानों को 10 से 15 दिनों के भीतर मुआवजा उपलब्ध कराने का प्रावधान है। विभाग लगातार नुकसान का आकलन कर राहत पहुंचाने की प्रक्रिया को तेज कर रहा है।
डीएफओ ने बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों में वन विभाग की पेट्रोलिंग टीम लगातार गश्त कर रही है। साथ ही क्विक रिस्पांस टीम (QRT) को भी अलर्ट मोड में रखा गया है। किसी भी गांव से हाथियों की सूचना मिलने पर टीम तत्काल मौके पर पहुंचकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह देती है।
ग्रामीणों और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय के लिए व्हाट्सएप ग्रुप का भी संचालन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से हाथियों की लोकेशन और गतिविधियों की जानकारी तुरंत साझा की जाती है। इसके अलावा हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश से रोकने के लिए लगभग पांच किलोमीटर क्षेत्र में फेंसिंग का कार्य भी कराया जा रहा है।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि हाथियों के करीब जाने, उन्हें छेड़ने या भगाने की कोशिश न करें। किसी भी सूचना की तत्काल जानकारी विभाग या प्रशासन को दें। विभाग का मानना है कि जनसहयोग और सतर्कता से मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को प्रभावी रूप से रोका जा सकता है।
संवाददाता : नीतीश कुमार
स्थान : धनबाद






