सरकारी सिस्टम की शर्मनाक तस्वीर! खुले आसमान के नीचे चलने लगा न्यूबॉर्न वार्ड



बक्सर: बिहार के बक्सर जिले के डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल से सामने आई एक तस्वीर ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन नवजात शिशुओं को जन्म के बाद पूरी तरह सुरक्षित, स्वच्छ और नियंत्रित तापमान वाले वातावरण में रखा जाना चाहिए था, उन्हें अस्पताल की लापरवाही के कारण 40 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी में पेड़ की छांव के नीचे इलाज के लिए मजबूर होना पड़ा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया है और जांच के आदेश दिए गए हैं।

जानकारी के अनुसार शनिवार को आई आंधी और बारिश के बाद अस्पताल की बिजली व्यवस्था ठप हो गई। सबसे ज्यादा असर मदर न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एमएनसीयू) पर पड़ा, जहां भर्ती नवजात शिशुओं को लगातार बिजली और तापमान नियंत्रित वातावरण की जरूरत होती है। अस्पताल का बिजली चेंजर पहले से खराब था, जिसके कारण वैकल्पिक व्यवस्था भी शुरू नहीं हो सकी।

रविवार को जब गंभीर हालत में कई नवजात इलाज के लिए पहुंचे तो डॉक्टरों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। ऐसे हालात में प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. प्रेमा कुमारी और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक कुमार ने अस्पताल परिसर में पीपल के पेड़ की छांव को अस्थायी वार्ड बना दिया। स्वास्थ्यकर्मियों ने खुले वातावरण में ही नवजातों की देखभाल शुरू की और एक गंभीर रूप से बीमार बच्चे की जान बचाने में सफलता भी हासिल की।

विशेषज्ञों के अनुसार नवजातों के लिए नियंत्रित तापमान और संक्रमण मुक्त वातावरण बेहद जरूरी होता है। ऐसे में भीषण गर्मी और खुले माहौल में उनका इलाज करना किसी बड़े खतरे से कम नहीं था।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल प्रशासन ने 22 मई को ही अधिकारियों को लिखित रूप से बिजली चेंजर खराब होने की सूचना दे दी थी, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब मामला उजागर होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एसआईटी गठित कर जांच शुरू कर दी है। सिविल सर्जन डॉ. शिव कुमार प्रसाद चक्रवर्ती ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया है।

डुमरांव अस्पताल की यह घटना केवल तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता और लापरवाही का ऐसा उदाहरण है, जिसने मासूम नवजातों की जिंदगी को जोखिम में डाल दिया।

  • Related Posts

    गंडक नदी उफान पर, 6 लाख क्यूसेक तक पहुंच सकता है डिस्चार्ज; बगहा में बाढ़ का खतरा बढ़ा

    गंडक नदी उफान पर, 6 लाख क्यूसेक तक पहुंच सकता है डिस्चार्ज; बगहा में बाढ़ का खतरा बढ़ा

    नशा मुक्त कोसी अभियान में बड़ी सफलता, एक सप्ताह में 92 आरोपित गिरफ्तार

    सहरसा। कोसी क्षेत्र के सहरसा, सुपौल और मधेपुरा जिलों में चलाए जा रहे नशा मुक्त कोसी अभियान के तहत पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। 19 से 25 सितंबर के…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *