बिहार के जमुई जिले में निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए झाझा थाना में पदस्थापित चालक सिपाही जितेंद्र कुमार को 12 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। वहीं छापेमारी के दौरान थाना प्रभारी लाल बहादुर सिंह के मौके पर नहीं मिलने से कई सवाल खड़े हो गए हैं और निगरानी टीम उनकी तलाश में जुट गई है।
जानकारी के अनुसार झाझा क्षेत्र में अवैध बालू उठाव और परिवहन के नाम पर ट्रैक्टर चालकों तथा बालू कारोबारियों से प्रतिदिन अवैध वसूली किए जाने की शिकायत निगरानी विभाग को मिली थी। शिकायतकर्ता उमेश यादव ने 25 मई को विशेष निगरानी इकाई, पटना में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि बालू लदे ट्रैक्टरों के संचालन के बदले पैसे की मांग की जा रही है।
शिकायत की सत्यता जांचने के बाद निगरानी विभाग ने जाल बिछाया। तय योजना के तहत शिकायतकर्ता द्वारा 12 हजार रुपये दिए जाने थे। जैसे ही चालक सिपाही जितेंद्र कुमार ने रकम ली, निगरानी टीम ने उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ के दौरान गिरफ्तार चालक सिपाही ने दावा किया कि बरामद राशि उसकी नहीं, बल्कि थाना प्रभारी लाल बहादुर सिंह के लिए ली जा रही थी। इस खुलासे के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। निगरानी विभाग अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रहा है और यह पता लगाने में जुटा है कि अवैध वसूली में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
सूत्रों के अनुसार बालू कारोबारियों से प्रतिदिन 20 हजार रुपये तक की मांग की जाती थी, हालांकि शिकायतकर्ता 12 हजार रुपये देने पर तैयार हुआ था। इसी दौरान मामले की सूचना निगरानी विभाग तक पहुंच गई और कार्रवाई की योजना बनाई गई।
मामले पर पुलिस उपाधीक्षक कृष्ण कुमार गुप्ता ने बताया कि शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई और 12 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए चालक सिपाही को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है तथा मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।