बिहार में 11 संस्कृत विद्यालय बंद, मदरसों की जांच बुनियादी सुविधाओं के सुधार के लिए : शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी
सहरसा स्थित विकास भवन में मंगलवार की देर शाम जिला बीस सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिले के प्रभारी मंत्री सह बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने की। बैठक में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विधायकों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान विकास योजनाओं, शिक्षा व्यवस्था, संभावित बाढ़ की तैयारियों और विभिन्न विभागों के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सभी विभागों की योजनाओं की समीक्षा की गई है तथा तीन महीने बाद फिर से समीक्षा बैठक आयोजित कर प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि संभावित बाढ़ को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं, ताकि आपदा की स्थिति में आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत तथा गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। इसी दिशा में गुरुकुलम विद्यापीठ की स्थापना की योजना पर भी रणनीति तैयार की जा रही है और जल्द ही इस पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
संस्कृत विद्यालयों और मदरसों से जुड़े सवालों के जवाब में मंत्री ने बताया कि राज्य में 11 संस्कृत विद्यालयों को बंद किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसी भी शिक्षण संस्थान को कमजोर करना नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, संसाधनयुक्त और गुणवत्तापूर्ण बनाना है।
मदरसों की जांच के संबंध में उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया किसी पूर्वाग्रह के तहत नहीं चलाई जा रही है। शिक्षा विभाग का प्रयास है कि संस्कृत विद्यालयों और मदरसों दोनों में बुनियादी सुविधाएं बेहतर हों और दोनों संस्थान समान रूप से आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जांच के माध्यम से वहां उपलब्ध संसाधनों, सुविधाओं और वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है कि वह धरातल पर संस्थानों की वास्तविक स्थिति का आकलन करे। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।