रैयतों को न्याय दिलाने पर विधानसभा समिति का जोर, धनबाद में तीन दिवसीय बैठक शुरू


धनबाद : खनन परियोजनाओं से प्रभावित रैयत परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और नियोजन दिलाने के उद्देश्य से विधानसभा की ध्यान आकर्षण विशेष समिति की तीन दिवसीय बैठक सोमवार से धनबाद परिसदन में शुरू हुई। बैठक में बीसीसीएल, सीसीएल और ईसीएल की विभिन्न खनन परियोजनाओं से प्रभावित लोगों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में रैयत परिवारों ने अपने आवेदन भी समिति के समक्ष प्रस्तुत किए, जिनकी समीक्षा की जा रही है।


समिति के अध्यक्ष एवं टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने कहा कि समिति का मुख्य उद्देश्य खनन कार्यों के कारण भूमि गंवाने वाले रैयतों को न्याय दिलाना है। उन्होंने बताया कि प्रभावित लोगों के भूमि संबंधी दस्तावेजों की जांच कर नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि खनन कंपनियों द्वारा राज्य सरकार की कितनी भूमि का उपयोग किया गया है और उसके एवज में कितना राजस्व जमा कराया गया है।


मथुरा महतो ने जानकारी दी कि बीसीसीएल द्वारा उपयोग की गई सरकारी जमीन के बदले राज्य सरकार को लगभग 220 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। अन्य खनन कंपनियों से भी इसी प्रकार बकाया राजस्व की वसूली की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि समिति के गठन को लगभग नौ माह हो चुके हैं और इस अवधि में प्रभावित परिवारों की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।


वहीं, निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने कहा कि कई रैयत परिवार वर्षों से उचित मुआवजे की प्रतीक्षा कर रहे हैं। समिति का प्रयास है कि पात्र लोगों को उनका अधिकार मिले। उन्होंने बताया कि जिन परिवारों के पास वैध भूमि दस्तावेज उपलब्ध हैं, उन्हें मुआवजा देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा दो एकड़ या उससे अधिक भूमि प्रभावित होने की स्थिति में नियोजन देने के प्रावधान पर भी विचार किया जा रहा है।


बैठक में मौजूद बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि कंपनी प्रभावित रैयतों को नियमानुसार मुआवजा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पात्रता सुनिश्चित करने के लिए भूमि संबंधी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। साथ ही प्रभावित परिवारों से बीसीसीएल के पुनर्वास क्षेत्रों में उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाने की अपील भी की।


तीन दिनों तक चलने वाली इस बैठक से प्रभावित रैयत परिवारों को राहत मिलने और लंबे समय से लंबित मामलों के समाधान की उम्मीद बढ़ी है।

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