गाय के टिकारी प्रखंड स्थित गुलरियाचक गांव में आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा नहीं पहुंच सकी है। स्टेट हाईवे-69 से सिर्फ 2 किलोमीटर दूर बसे इस गांव के लोग दशकों से बदहाल रास्ते के सहारे जिंदगी काट रहे हैं। विकास और सड़क निर्माण के सरकारी दावों के बीच गांव की हालत लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है।

ग्रामीणों के मुताबिक सड़क नहीं होने से गांव में न तो एंबुलेंस पहुंचती है और न ही चार पहिया वाहन। बारिश के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। लोगों को कीचड़ से गुजरकर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है। गांव के बच्चों को स्कूल जाने में भारी दिक्कत होती है, जबकि गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को खाट पर टांगकर अस्पताल ले जाना पड़ता है। कई बार इलाज में देरी के कारण लोगों की जान भी चली गई।

गांव की सबसे बड़ी समस्या शादियों को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने की वजह से रिश्ते टूट जाते हैं। लड़की पक्ष गांव की बदहाल स्थिति देखकर शादी से इनकार कर देता है। कई युवक उम्र बीतने के बाद भी अविवाहित हैं। ग्रामीण राजेश यादव बताते हैं कि “जहां सड़क नहीं, वहां लोग बेटी की शादी करने से डरते हैं।”

करीब 250 घरों और 1500 से अधिक आबादी वाले गुलरियाचक, छक्कन बीघा और खेवन बीघा गांव आज भी सड़क के इंतजार में हैं। ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर मिट्टी डालकर रास्ता चलने लायक बनाया, लेकिन पक्की सड़क आज तक नहीं बनी। नल-जल योजना की पाइपलाइन और टंकी भी बेकार पड़ी है, क्योंकि गांव में अब तक पानी की सप्लाई शुरू नहीं हुई।

  • ग्रामीण बताते हैं कि वर्ष 1983 में karpoori Thakur भी गांव पहुंचे थे। उन्हें भी 2 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा था। उन्होंने सड़क बनवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन वह वादा आज तक अधूरा है।

अब ग्रामीणों का सवाल सीधा है—“जब सड़क ही नहीं, तो जिंदगी कैसे चलेगी?”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *