बिहार के किशनगंज जिले के रहने वाले मौलाना तौसीफ रजा मजहरी की उत्तर प्रदेश के बरेली में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है. इस घटना को लेकर परिजनों और पुलिस के बीच अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है.
मृतक मौलाना तौसीफ रजा किशनगंज के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत भोगडावर पंचायत के निवासी थे. परिजनों के अनुसार, वे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में इमामत की जिम्मेदारी निभा रहे थे और हाल ही में बरेली में आयोजित उर्स ए ताजुश्शरिया में शामिल होकर वापस लौट रहे थे. बताया जा रहा है कि 26 अप्रैल 2026 को वे ट्रेन संख्या 04314 के जनरल कोच में सफर कर रहे थे.
परिजनों का आरोप है कि यात्रा के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने उनके साथ मारपीट की और लूटपाट की कोशिश की. उनका कहना है कि इसी दौरान उन्हें बेरहमी से पीटा गया, जिससे उनकी मौत हो गई. बाद में उनका शव बरेली जंक्शन के पास बरामद हुआ.
इस घटना के बाद परिजनों ने सोशल मीडिया के जरिए न्याय की मांग उठाई है. मामले को गंभीरता से लेते हुए बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. आयोग के अध्यक्ष मौलाना गुलाम रसूल बलियावी ने कहा कि दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर सख्त सजा दी जानी चाहिए.
वहीं, एआईएमआईएम ने भी इस मामले को लेकर सवाल उठाए हैं. पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने इसे हत्या करार देते हुए केंद्र सरकार और रेल मंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग की है. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन ने पीड़ित परिवार को मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है.
हालांकि, बरेली पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे हादसा बताया है. पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में मारपीट या साजिश के कोई सबूत नहीं मिले हैं. उनका कहना है कि अत्यधिक गर्मी के कारण मौलाना ट्रेन के दरवाजे पर बैठे-बैठे असंतुलित होकर गिर गए, जिससे गंभीर चोटें आईं और उनकी मौत हो गई.
फिलहाल, इस मामले में सच्चाई क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा.
