बिहार के सहरसा में वन विभाग की लापरवाही अब लोगों की जान पर भारी पड़ती नजर आ रही है। शहर के कई इलाकों में सड़क किनारे लगे हजारों पेड़ लंबे समय से सूख चुके हैं, लेकिन इन्हें हटाने या काटने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यह स्थिति खासकर तब और चिंताजनक हो गई है, जब मौसम विभाग ने आंधी-तूफान की चेतावनी जारी की है।

नगर निगम क्षेत्र के कई हिस्सों में, जहां बड़ी संख्या में लोग झुग्गी-झोपड़ियों में रहते हैं, वहां हालात बेहद भयावह हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि तेज हवा चलने पर ये सूखे पेड़ कभी भी गिर सकते हैं, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं हर समय डर के साए में जीने को मजबूर हैं।

निवासियों का आरोप है कि उन्होंने कई बार वन विभाग और प्रशासन से इस समस्या की शिकायत की, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, सूखे पेड़ आंधी या तेज हवा में सबसे ज्यादा खतरनाक साबित होते हैं, क्योंकि उनकी जड़ें कमजोर हो चुकी होती हैं। ऐसे में समय रहते इन्हें हटाना बेहद जरूरी होता है, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द सूखे पेड़ों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित तरीके से हटाया जाए। साथ ही, भविष्य में इस तरह की लापरवाही न हो, इसके लिए नियमित निरीक्षण की व्यवस्था भी की जाए।

अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या समय रहते कार्रवाई कर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा? फिलहाल, के लोग डर और अनिश्चितता के बीच जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

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