रोहतास जिले के डेहरी अनुमंडलीय अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है। बिहार सरकार जहां बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे कर रही है, वहीं इस अस्पताल में प्रसूति महिलाओं का इलाज पूरी तरह पुरुष डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है। अस्पताल में फिलहाल एक भी महिला गाइनेकोलॉजिस्ट मौजूद नहीं है, जिससे दूर-दराज से आने वाली गर्भवती महिलाओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के मुताबिक, विभाग ने डॉ. प्रियंका कुमारी और डॉ. पिंकी कुमारी को यहां डेपुटेशन पर भेजा था, लेकिन करीब 45 दिन बीत जाने के बाद भी दोनों डॉक्टरों ने योगदान नहीं दिया। इस कारण डेहरी, तिलौथू, रोहतास, नौहट्टा और आसपास के ग्रामीण इलाकों से आने वाली महिला मरीज बिना समुचित इलाज के लौटने को मजबूर हैं।
अस्पताल के डॉक्टर डॉ. राज ऋषि प्रसाद ने भी माना कि महिला मरीज पुरुष डॉक्टरों के सामने अपनी समस्या खुलकर नहीं बता पातीं। फिलहाल एएनएम और नर्सों के भरोसे ही प्रसव कराया जा रहा है। आरटीआई एक्टिविस्ट रंजन कुमार ने इस मामले को लोक शिकायत निवारण में उठाते हुए विभागीय लापरवाही पर सवाल खड़े किए हैं।
बताया जा रहा है कि पहले यहां तैनात डॉक्टर दिव्या शिवानी मातृत्व अवकाश पर चली गईं, जिसके बाद अस्पताल में महिला डॉक्टरों की कमी शुरू हुई। बाद में भेजी गईं डॉक्टर मीनू अमानी और डॉ. श्वेता राज भी दूसरे कारणों से यहां से चली गईं। अब स्थिति यह है कि प्रतिदिन करीब 200 मरीजों का इलाज करने वाले इस अस्पताल में महिला डॉक्टर का एक भी पद भरा नहीं है।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने जल्द महिला डॉक्टरों की नियुक्ति की मांग की है। वहीं सिविल सर्जन डॉ. मणिराज रंजन ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि ड्यूटी ज्वाइन नहीं करने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई की जाएगी।


