बिहार की जीआई-टैग प्राप्त विश्वप्रसिद्ध शाही लीची ने अब हवाई सफर के जरिए देश के बड़े बाजारों तक अपनी पहुंच और मजबूत कर ली है. शनिवार को दरभंगा एयरपोर्ट से मुजफ्फरपुर की शाही लीची की पहली हवाई खेप अहमदाबाद भेजी गई. इसे बिहार के बागवानी और कृषि-लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.
हर साल मुजफ्फरपुर की शाही लीची का स्वाद देश और विदेश तक पहुंचता है, लेकिन इस बार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और खाड़ी देशों में युद्ध जैसे हालातों का असर कारोबार पर पड़ा है. इसके बावजूद किसान, व्यापारी और उत्पादक संगठन अलग-अलग माध्यमों से लीची को बाजार तक पहुंचाने में जुटे हैं.
लीची उत्पादक संघ के कृष्ण गोपाल सिंह ने बताया कि इस बार शाही लीची की मांग करीब दस लाख टन तक है, लेकिन पर्याप्त परिवहन सुविधा नहीं मिल पा रही है. उन्होंने कहा कि ट्रेन, बस और हवाई जहाज के जरिए लीची भेजने की कोशिश की जा रही है. खासतौर पर हवाई मार्ग से भेजी जाने वाली लीची प्रीमियम ग्राहकों के लिए होती है, क्योंकि यह केवल 6 से 7 घंटे में बड़े बाजारों तक पहुंच जाती है और उसकी ताजगी बनी रहती है.
उन्होंने यह भी बताया कि पहले खाड़ी देशों में बिहार की शाही लीची की काफी मांग थी, लेकिन मौजूदा युद्ध के कारण वहां निर्यात में परेशानी आ रही है. हालांकि अब यूके, न्यूजीलैंड और रूस जैसे देशों से अच्छी मांग मिल रही है, जिससे कारोबारियों को नई उम्मीद जगी है.
इस पूरी पहल को सफल बनाने में मुजफ्फरपुर की स्टार्टअप कंपनी ‘विश्वकेनह एग्रो एंड डेयरी प्राइवेट लिमिटेड’ ने अहम भूमिका निभाई है. कंपनी किसानों को खेती, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है.
इस सफल पहल के बाद दरभंगा एयरपोर्ट अब उत्तर बिहार के कृषि कार्गो केंद्र के रूप में नई पहचान बना रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि हवाई परिवहन से किसानों को बेहतर बाजार और बेहतर दाम मिल सकेंगे.


