नेपाल में नई सरकार बनने के बाद जहां नेपाल और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में खुशी का माहौल था, वहीं अब नेपाल सरकार के नए भंसार टैक्स नियम ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर और मुजफ्फरपुर की ऐतिहासिक सूतापट्टी मंडी पर इसका सीधा असर दिख रहा है।
अप्रैल से शुरू होने वाला शादी-विवाह का सीजन कपड़ा और ज्वेलरी कारोबार के लिए सबसे अहम समय होता है। हर साल इस दौरान सूतापट्टी में 400 से 500 करोड़ रुपये तक का कारोबार होता है, जिसमें बड़ा हिस्सा नेपाल से आने वाले ग्राहकों का होता है। लेकिन इस बार नए टैक्स नियम के कारण करीब 300 करोड़ रुपये तक के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
नेपाल सरकार के नए नियम के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति 100 नेपाली रुपये से अधिक का सामान भारत से नेपाल ले जाता है, तो उस पर कस्टम ड्यूटी और वैट देना अनिवार्य होगा। पहले जहां 100 रुपये के सामान पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता था, अब उसी पर करीब 30% तक अतिरिक्त लागत आ रही है। इससे सामान महंगा हो गया है और नेपाली ग्राहक भारत आने से बच रहे हैं।
मुजफ्फरपुर की सूतापट्टी मंडी, जो 100 साल से भी ज्यादा पुरानी है और उत्तर बिहार की सबसे बड़ी कपड़ा मंडी मानी जाती है, इस बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। यहां 750 से अधिक कपड़ों की दुकानें और सैकड़ों ज्वेलरी शोरूम हैं, जिनका बड़ा कारोबार नेपाल पर निर्भर करता है।
व्यापारियों का कहना है कि टैक्स बढ़ने से ग्राहकों का रुझान कम हुआ है और बिक्री में गिरावट साफ दिखाई दे रही है। सीमावर्ती इलाके जैसे रक्सौल और जयनगर भी इस असर से अछूते नहीं हैं।
चैंबर ऑफ कॉमर्स ने भी स्थिति को चिंताजनक बताया है और दोनों देशों की सरकारों से समाधान निकालने की अपील की है। व्यापारियों की उम्मीद है कि आने वाले समय में इस नीति पर पुनर्विचार होगा, ताकि दोनों देशों के पारंपरिक व्यापारिक रिश्ते बने रहें।
