मुजफ्फरपुर के कन्हौली टीओपी में चल रही पुलिस पाठशाला अब रेड लाइट एरिया और स्लम के बच्चों के लिए नई उम्मीद बन गई है। यहां बच्चों को सिर्फ शिक्षा ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की सीख भी दी जा रही है। कभी पुलिस को देखकर डरने वाले बच्चे अब पुलिसकर्मियों का ‘जय हिंद’ बोलकर स्वागत करते हैं। इस पहल ने अब ‘गुल्लक बैंक’ से आगे बढ़कर बैंक एफडी तक का सफर तय कर लिया है।
दरअसल, बच्चों में बचत की आदत विकसित करने के लिए पाठशाला में पहले ‘गुल्लक बैंक’ की शुरुआत की गई थी। इसके तहत बच्चे हर महीने 50 रुपये जमा करते हैं, जबकि जन्मदिन पर उनके खाते में 500 रुपये डाले जाते हैं। इस तरह हर बच्चे के खाते में सालाना करीब 1100 रुपये जमा हो चुके हैं।
अब मेधावी बच्चों के खातों में अतिरिक्त राशि जोड़कर बैंक में फिक्स डिपॉजिट कराया गया है। बच्चों को बैंक पासबुक भी सौंपी गई। इस पहल को बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
एसबीआई के चीफ जनरल मैनेजर अनुराग जोशी ने कहा कि बच्चों को एफडी पासबुक सौंपना बेहद खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि यह पहल बच्चों की शिक्षा और भविष्य को मजबूत करेगी और आने वाले समय में यही बच्चे बैंकिंग, प्रशासनिक सेवा समेत कई क्षेत्रों में पहचान बनाएंगे।
पुलिस पाठशाला की शुरुआत साल 2013 में दीपावली के बाद सामाजिक कार्यकर्ता नसीमा खातून ने की थी। शुरुआत में यहां सिर्फ 10 से 15 बच्चे आते थे, लेकिन अब 150 से ज्यादा बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। एएसपी अवधेश दीक्षित रोज शाम बच्चों को पढ़ाने पहुंचते हैं और बच्चों को मुफ्त किताबें, कॉपी, पेन-पेंसिल भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
नसीमा खातून ने बताया कि एसबीआई की CSR पहल के तहत बच्चों को कंप्यूटर, ड्रेस, पढ़ाई की सामग्री और आरओ वाटर कूलर भी उपलब्ध कराया गया है। वहीं सिटी एसपी मोहिबुल्ला अंसारी ने कहा कि यह पहल उन बच्चों को आगे बढ़ने का मौका दे रही है, जिन्हें समाज अक्सर नजरअंदाज कर देता है।


