झारखंड के बोकारो से एक चिंताजनक मामला सामने आ रहा है, जहां 27 अगस्त 2025 से लापता लैब टेक्नीशियन संतोष कुमार का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। महीनों बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं, जिससे परिजनों में गहरी नाराजगी है।

 

बोकारो के सेक्टर 6 थाना क्षेत्र से लापता लैब टेक्नीशियन संतोष कुमार का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। परिवार ने उनकी सुरक्षित बरामदगी या पुख्ता सूचना देने वाले के लिए 2 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की है, लेकिन इसके बावजूद मामले में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।

 

संतोष के गायब होने के बाद से परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहा है। देहरादून में पढ़ रही उनकी बेटी की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जबकि रिटायर्ड पिता लक्ष्मी सिंह की मात्र 3,000 रुपये की पेंशन से ही घर का खर्च किसी तरह चल रहा है।

 

परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जांच में लापरवाही बरती जा रही है। उनका कहना है कि पुलिस केवल आश्वासन देती है और उल्टा परिवार पर ही संदेह जताकर दबाव बनाने की कोशिश करती है।

 

परिवार के अनुसार, संतोष 27 अगस्त की सुबह करीब 6 बजे घर से निकले थे, लेकिन उसके बाद न तो वे घर लौटे और न ही अपनी ड्यूटी पर पहुंचे। परिजनों ने खुद जांच करते हुए सेक्टर 11 स्थित एक पेट्रोल पंप के सीसीटीवी फुटेज की जांच की, जिसमें संतोष आखिरी बार एक महिला उर्मिला के साथ नजर आए।

 

फुटेज में संतोष के पीछे बाइक पर बैठी महिला दिखी, और बाद में वही बाइक सेक्टर 11 के निचले ब्लॉक में खड़ी मिली। परिजनों का आरोप है कि उक्त महिला को पुलिस ने पूछताछ के बाद छोड़ दिया और बाद में किसी अन्य मामले में जेल भेज दिया।

 

परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि महिला को पकड़ने के लिए पुलिस ने उनसे ही किराये की गाड़ी मंगवाई और खर्च भी उन्हीं से वसूला। वहीं पुलिस द्वारा नार्को टेस्ट की बात कहकर परिजनों को दबाव में लेने का भी आरोप लगाया गया है।

 

इस मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।

 

अब परिजन न्याय की आस में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं। वहीं, नए पुलिस कप्तान नाथू सिंह मीणा के सामने यह मामला बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *