बिहार के बेतिया से मानवता को झकझोर देने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। बैरिया थाना क्षेत्र के खुशी टोला में संचालित एक कथित सहारा वृद्धा आश्रम में बुजुर्गों के साथ अमानवीय व्यवहार का खुलासा हुआ है। आरोप है कि यहां बुजुर्गों को बंधक बनाकर रखा जाता था और उनके साथ लगातार मारपीट की जाती थी।

 

मंगलवार को सूचना मिलने के बाद एसडीएम विकास कुमार के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने आश्रम में छापेमारी की। मौके पर पहुंची टीम ने देखा कि परिसर अंदर और बाहर से बंद था, जिससे संदेह और गहरा गया। जब दरवाजा खोला गया तो अंदर का नजारा बेहद दर्दनाक था। वहां रह रहे बुजुर्गों की हालत दयनीय थी और कई के शरीर पर चोट के निशान साफ दिखाई दे रहे थे।

 

रेस्क्यू के दौरान बुजुर्गों ने जो बताया, वह और भी चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा कि उन्हें बहला-फुसलाकर यहां लाया गया और फिर कैदियों की तरह रखा गया। घर जाने की बात करने पर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की जाती थी। कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें पटना के महावीर मंदिर और विभिन्न रेलवे स्टेशनों से लाकर यहां रखा गया था।

 

जांच में यह भी सामने आया कि आश्रम का लाइसेंस अप्रैल महीने में ही रद्द हो चुका था, इसके बावजूद संचालक अवैध रूप से इसे चला रहे थे। प्रशासन का मानना है कि सरकारी आर्थिक लाभ लेने के उद्देश्य से इस गतिविधि को जारी रखा गया।

 

छापेमारी के दौरान लाठी-डंडे भी बरामद किए गए, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर बुजुर्गों को प्रताड़ित करने में किया जाता था। वहीं, मेडिकल जांच में बिना प्रिस्क्रिप्शन दवाइयों के इस्तेमाल की आशंका जताई गई। एक युवती खुद को नर्स बता रही थी, लेकिन उसके पास कोई वैध डिग्री नहीं मिली।

 

स्थानीय लोगों ने भी खुलासा किया कि आश्रम से अक्सर रोने और चीखने की आवाजें आती थीं। मकान मालकिन ने भी 21 महीनों से किराया नहीं मिलने की शिकायत की थी।

 

फिलहाल प्रशासन ने सभी 15 बुजुर्गों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान ‘उमंग’ केंद्र भेज दिया है। संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

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