बिहार के बेतिया से मानवता को शर्मसार करने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। बैरिया थाना क्षेत्र के खुशी टोला स्थित एक कथित सहारा वृद्धा आश्रम में बुजुर्गों के साथ अमानवीय व्यवहार का खुलासा हुआ है। सूचना मिलने पर एसडीएम विकास कुमार के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने छापेमारी की, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

जांच के दौरान पता चला कि आश्रम का लाइसेंस अप्रैल महीने में ही रद्द कर दिया गया था, बावजूद इसके इसे अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था। आरोप है कि संचालक सरकारी लाभ लेने के उद्देश्य से बुजुर्गों को जबरन यहां रख रहे थे। छापेमारी के समय आश्रम के अंदर और बाहर ताला लगा मिला, जिससे संदेह और गहरा हुआ।

अंदर पहुंचने पर बुजुर्गों की हालत बेहद दयनीय पाई गई। कई के शरीर पर चोट के निशान थे, जो मारपीट और उत्पीड़न की कहानी बयां कर रहे थे। रेस्क्यू किए गए लोगों ने बताया कि उन्हें बहला-फुसलाकर लाया गया और फिर कैदियों की तरह रखा गया। घर जाने की बात करने पर उनके साथ मारपीट की जाती थी। कुछ ने यह भी कहा कि उन्हें पटना के मंदिरों और रेलवे स्टेशनों से लाकर यहां रखा गया।

स्थानीय लोगों ने भी आश्रम पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि अक्सर वहां से रोने और चीखने की आवाजें आती थीं। मकान मालकिन ने भी शिकायत की कि पिछले 21 महीनों से किराया नहीं दिया गया और उन्हें अपने ही घर में प्रवेश नहीं करने दिया जाता था।

प्रशासन ने मौके से लाठी-डंडे बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल कथित रूप से बुजुर्गों को डराने और पीटने में होता था। बिना अनुमति के रिहैबिलिटेशन सेंटर चलाया जा रहा था और बिजली की आपूर्ति भी अवैध रूप से ली जा रही थी। मेडिकल जांच में बिना प्रिस्क्रिप्शन दवाइयों के उपयोग की आशंका भी जताई गई।

फिलहाल सभी 15 बुजुर्गों को सुरक्षित निकालकर ‘उमंग’ केंद्र भेज दिया गया है। आश्रम संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

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