बोकारो में मंगलवार शाम चास स्थित सुभाष चंद्र बोस स्मारक चेक पोस्ट में सर्राफा व्यवसायियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति, सोने की बढ़ती कीमतों और प्रधानमंत्री द्वारा एक वर्ष तक सोना नहीं खरीदने की अपील पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में शामिल व्यवसायियों ने कहा कि वे देशहित में प्रधानमंत्री के आह्वान का समर्थन करते हैं और राष्ट्रीय आर्थिक मजबूती के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल सोना नहीं खरीदने की अपील से छोटे व्यापारियों, कारीगरों और मजदूरों की स्थिति प्रभावित होगी, इसलिए सरकार को वैकल्पिक आर्थिक उपायों पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए।
व्यवसायियों ने मांग उठाई कि बड़े कॉर्पोरेट घरानों और ब्रांडेड ज्वेलरी शोरूम पर नियंत्रण लगाया जाए, ताकि छोटे सर्राफा व्यापारियों को राहत मिल सके। साथ ही देश के विभिन्न मंदिर ट्रस्टों में जमा विशाल मात्रा में सोने को भारतीय बाजार में लाने की व्यवस्था करने की भी मांग की गई, जिससे आर्थिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सके।
बैठक में भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग उठी। सर्राफा कारोबारियों ने कहा कि सरकार को सांसदों और विधायकों के मानदेय तथा पेंशन पर रोक लगाने, अनावश्यक पेंशन योजनाओं की समीक्षा करने और छोटे व्यापारियों को राहत देने के लिए एक वर्ष तक जीएसटी, इनकम टैक्स और बैंक ब्याज में छूट देने पर विचार करना चाहिए।
व्यवसायियों ने यह भी कहा कि रोज कमाकर जीवन यापन करने वाले कारीगरों, सुनार मजदूरों और छोटे कामगारों के लिए सरकार को एक वर्ष तक गुजारा भत्ता सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि आर्थिक संकट के दौरान उनका जीवन प्रभावित न हो।
बैठक में मौजूद सर्राफा व्यवसायियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एक माह के भीतर सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो बोकारो जिले के सर्राफा व्यवसायी अपनी दुकानें बंद कर चरणबद्ध आंदोलन और धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे।
व्यवसायियों ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल व्यापार बचाना नहीं, बल्कि छोटे कारोबारियों, कारीगरों और देशहित की रक्षा करना है।
संवाददाता – चंदन सिंह, बोकारो


