बिहार के Kishanganj में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है. एक व्यक्ति से कथित मारपीट और एनकाउंटर की धमकी देने के आरोप में गर्वनडंगा थाना में तैनात परिवीक्ष्यमान पुलिस अवर निरीक्षक नितेश कुमार वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. यह कार्रवाई एसपी संतोष कुमार ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर की है.
मामला उमेदा खातून हत्याकांड की जांच से जुड़ा है. पुलिस ने पूछताछ के लिए मृतका के बेटे को हिरासत में लिया था. पीड़ित युवक ने आरोप लगाया कि हत्या कबूल करवाने के लिए उसे बेरहमी से पीटा गया और फर्जी एनकाउंटर की धमकी भी दी गई. युवक ने कहा कि उसकी मां की हत्या हुई थी, लेकिन असली कातिलों को पकड़ने के बजाय पुलिस उसे ही आरोपी बनाने की कोशिश कर रही थी.
पीड़ित द्वारा जारी वीडियो वायरल होने के बाद एसपी ने मामले का संज्ञान लिया. जांच में प्रथम दृष्टया पुलिसकर्मियों की लापरवाही और मनमाने व्यवहार की बात सामने आने पर PSI नितेश कुमार वर्मा को निलंबित कर दिया गया. साथ ही थाना अध्यक्ष बीएचजी/410684 छठूलाल राय को पुलिस केंद्र वापस भेज दिया गया है. उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए डीएम को पत्र भेजा जा रहा है.
एसपी संतोष कुमार ने बताया कि निलंबित अधिकारी को 7 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है. वहीं पूरे मामले की जांच एसडीपीओ-2 को सौंपी गई है, जिन्हें 24 घंटे में रिपोर्ट देने को कहा गया है.
पुलिस प्रशासन ने साफ किया है कि जांच रिपोर्ट में यदि थानाध्यक्ष कुंदन कुमार या अन्य पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस घटना के बाद जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर बहस तेज हो गई है.


