
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर देशभर में अलग-अलग तरीके से कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सहरसा में भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके जन्मदिन को खास अंदाज में मनाने की तैयारी की है। शाहपुर स्थित बाढ़ आश्रय स्थल पर हजारों दीप जलाकर दीपोत्सव मनाने की बात कही जा रही है। लेकिन इस आयोजन ने अब जश्न से ज्यादा राजनीतिक चर्चा का रूप ले लिया है।
मामला इसलिए भी दिलचस्प है कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों से रोजमर्रा के खर्च और संसाधनों में बचत करने की अपील करते हैं, ताकि देश की प्रगति में हर व्यक्ति अपनी छोटी-सी हिस्सेदारी निभा सके। वहीं, दूसरी तरफ उनके जन्मदिन पर हजारों दीप जलाने की तैयारी ने सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जनता किस संदेश को प्राथमिकता दे—बचत की सीख या जन्मदिन पर भव्य दीपोत्सव?
कटाक्ष का एक और पहलू यह है कि जिस बाढ़ आश्रय स्थल पर यह आयोजन प्रस्तावित बताया जा रहा है, वहां काम करने वाली जीविका दीदियों को कथित तौर पर इस कार्यक्रम की जानकारी तक नहीं है। ऐसे में आयोजन को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि, सत्तरकटैया भाजपा मंडल अध्यक्ष मनोरंजन चौधरी का कहना है कि यह कार्यक्रम भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा अपने खर्चे पर आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर उनके प्रति सम्मान और उनके दीर्घायु होने की कामना से जुड़ा आयोजन बताया।
अब सहरसा में चर्चा का विषय यही है कि प्रधानमंत्री की बचत वाली अपील और कार्यकर्ताओं के दीपोत्सव के बीच तालमेल कैसे बैठाया जाए। एक तरफ बचत का संदेश, दूसरी तरफ हजारों दीपों की तैयारी—जन्मदिन का उत्साह किस संदेश पर भारी पड़ता है, यह चर्चा अब आम लोगों के बीच भी दिखाई दे रही है।
फिलहाल भाजपा कार्यकर्ता इसे उत्सव और सम्मान का कार्यक्रम बता रहे हैं, जबकि विपक्ष को इसमें सवाल उठाने का मौका मिल गया है। शाहपुर का यह दीपोत्सव अब सिर्फ जन्मदिन समारोह नहीं, बल्कि बचत बनाम भव्य आयोजन की बहस का विषय बनता नजर आ रहा है।





