जामताड़ा। जिला विधिक सेवा प्राधिकार, जामताड़ा के तत्वावधान में रविवार को जामताड़ा प्रखंड के माहुलडंगाल गांव में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध विधिक सहायता के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष शामिल हुए।
शिविर को संबोधित करते हुए अधिकार मित्र विश्वजीत पाल, अमित कुमार मिश्रा और राजेश दत्त ने कहा कि कानून की जानकारी प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। उन्होंने महिलाओं से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों की जानकारी सरल भाषा में दी और ग्रामीणों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की अपील की।
वक्ताओं ने दहेज प्रतिषेध अधिनियम, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम और लैंगिक समानता से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता में महिलाओं से जुड़े अपराधों के प्रावधानों की भी जानकारी दी। वक्ताओं ने कहा कि दहेज प्रथा आज भी समाज के लिए गंभीर समस्या बनी हुई है। इसके उन्मूलन के लिए कानूनी कार्रवाई के साथ सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है।
अधिकार मित्रों ने ग्रामीण महिलाओं को घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और अन्य प्रकार के शोषण के खिलाफ उपलब्ध कानूनी सुरक्षा के बारे में बताया। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि अन्याय को सहन करने के बजाय अपने अधिकारों के लिए आगे आएं और जरूरत पड़ने पर कानून की मदद लें।
शिविर में यह भी बताया गया कि आर्थिक रूप से कमजोर और पात्र लोग जिला विधिक सेवा प्राधिकार, जामताड़ा के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता एवं परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों की कानूनी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। आयोजकों ने कहा कि ऐसे शिविरों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कानूनी साक्षरता बढ़ाना और समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है।
संवाददाता – संतोष कुमार, जामताड़ा








