भागलपुर। जिले के सबौर प्रखंड के लगभग सभी गांवों में बाढ़ का पानी फैलने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। चारों ओर पानी ही पानी नजर आ रहा है। बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच ग्रामीणों के सामने परिवार को सुरक्षित रखने के साथ दो वक्त के भोजन की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ के कई दिन गुजर जाने के बावजूद सरकारी स्तर पर उन्हें पर्याप्त राहत सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
बाढ़ प्रभावित लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से भोजन की व्यवस्था करना तो दूर, सिर छिपाने के लिए पन्नी तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। बारिश और बाढ़ के पानी के बीच परिवार के साथ रहना मुश्किल हो गया है। कई परिवार खुले आसमान के नीचे या असुरक्षित स्थानों पर रहने को मजबूर हैं। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की परेशानी सबसे अधिक बढ़ गई है।
जनप्रतिनिधियों की शिकायत भी नहीं सुनने का आरोप
ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अंचल प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि समस्या लेकर जनप्रतिनिधियों के पास पहुंचने पर उन्हें सरकारी राहत शिविरों में जाकर अधिकारियों से शिकायत करने की सलाह दी जाती है। ग्रामीणों का दावा है कि शिकायत के बावजूद अंचलाधिकारी की ओर से अपेक्षित पहल नहीं की जा रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक, सरकारी कैंप में समस्या बताने पर उन्हें यह कहकर टाल दिया जाता है कि जो व्यवस्था चल रही है, उसे चलने दिया जाए और नियम के अनुसार कार्रवाई होगी। इससे बाढ़ पीड़ितों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
भोजन और सुरक्षित आश्रय की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि घरों में पानी घुसने और जरूरी सामान की कमी के कारण उनका जीवन संकट में है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल भोजन, पीने का पानी, पन्नी, सुरक्षित आश्रय और अन्य जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि आपदा की इस घड़ी में उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि तत्काल मदद चाहिए। प्रशासन को प्रभावित गांवों का जमीनी स्तर पर जायजा लेकर जरूरतमंद परिवारों की सूची तैयार करने और राहत सामग्री का पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करने की जरूरत है। अब देखना होगा कि अंचल प्रशासन बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।





