रांची: झारखंड की राजनीति से रविवार सुबह एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। गिरिडीह से झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक और हेमंत सरकार में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का असामयिक निधन हो गया है। देर रात अचानक सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, इलाज के दौरान सुबह उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही झारखंड के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई।
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन की जानकारी मिलते ही झारखंड मुक्ति मोर्चा ने गहरा दुख जताया। पार्टी की ओर से जारी शोक संदेश में कहा गया कि जीवन की अनिश्चितता ने एक बार फिर सभी को गहरे दुख और शोक में छोड़ दिया है। पार्टी ने उन्हें झामुमो का समर्पित साथी बताते हुए कहा कि उनका निधन पार्टी, सरकार और पूरे झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है।
झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडे ने भी सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यकीन करना मुश्किल है कि सुदिव्य कुमार इस तरह अचानक सभी को छोड़कर चले जाएंगे। उन्होंने इसे झामुमो के लिए ऐसी अपूरणीय क्षति बताया, जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी।
मनोज पांडे ने सुदिव्य कुमार सोनू के संघर्षपूर्ण जीवन को याद करते हुए कहा कि वह केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक आंदोलनकारी भी थे। झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने की लड़ाई में भी उनका योगदान रहा था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पहुंचने के बाद आगे के कार्यक्रम को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
झामुमो ने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू के संघर्ष, सेवा और राजनीतिक योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। पार्टी परिवार की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई और दिवंगत आत्मा की शांति के साथ उनके परिवार, समर्थकों और सभी साथियों को इस कठिन समय में संबल देने की प्रार्थना की गई।
सुदिव्य कुमार सोनू के अचानक निधन से झामुमो कार्यकर्ताओं और समर्थकों में गहरा शोक है। उनके निधन को झारखंड की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति के तौर पर देखा जा रहा है।






