
पटना: बिहार के शिक्षकों ने सातवें वेतन आयोग के अनुरूप वेतनमान और वित्तीय लाभ की मांग को लेकर रविवार को सोशल मीडिया पर बड़ा डिजिटल आंदोलन चलाया। शिक्षक संगठनों और बड़ी संख्या में शिक्षकों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर #BiharTeachersNeed7thPay हैशटैग के साथ पोस्ट कर अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की। अभियान दिनभर काफी समय तक ट्रेंड में रहा।
इस डिजिटल अभियान में बिहार के अलग-अलग वर्गों के शिक्षक शामिल हुए। विशिष्ट शिक्षक, विद्यालय अध्यापक, प्रधान शिक्षक, प्रधानाध्यापक और पुस्तकालयाध्यक्षों के वेतनमान से जुड़े सवालों को एक मंच से उठाया गया। शिक्षकों की प्रमुख मांग है कि राज्यकर्मी का दर्जा मिलने के बाद उन्हें सातवें वेतन आयोग की अनुशंसाओं के अनुरूप वास्तविक वेतन और फिटमेंट का लाभ दिया जाए।
शिक्षक नेता आनंद कौशल सिंह ने कहा कि राज्य के अलग-अलग वर्गों के शिक्षकों ने एकजुट होकर अपनी मांग मजबूती से सामने रखी है। उन्होंने कहा कि सातवें वेतन आयोग के अनुरूप वेतनमान शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही प्रमुख मांग है। राज्यकर्मी का दर्जा मिलने के बाद शिक्षकों को उम्मीद थी कि उन्हें वास्तविक वित्तीय लाभ मिलेगा, लेकिन वेतन और फिटमेंट से जुड़े मुद्दों पर उनकी अपेक्षाएं अभी पूरी नहीं हुई हैं।
आनंद कौशल सिंह के मुताबिक, यह केवल वेतन बढ़ाने का सवाल नहीं है, बल्कि शिक्षकों के आर्थिक सम्मान और अधिकारों से जुड़ा मुद्दा भी है। उन्होंने सरकार से शिक्षकों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
इस अभियान को बिहार कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी मदन मोहन झा का भी समर्थन मिला। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा— “चाइनीस वेतनमान से मुक्ति, उपकार नहीं अधिकार है।”
शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाई है। अब उनकी नजर सरकार की प्रतिक्रिया पर है। शिक्षक संगठनों को उम्मीद है कि सातवें वेतन आयोग के अनुरूप वेतन और फिटमेंट से जुड़े मुद्दों पर सरकार जल्द अपना स्पष्ट रुख सामने रखेगी।





