रक्षाबंधन के पावन पर्व पर जहां बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र की कामना कर रही थीं, वहीं जामताड़ा के नाला में इंसान और प्रकृति के रिश्ते को भी रक्षा सूत्र की डोर से जोड़ा गया। शुक्रवार को वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा जामताड़ा वन प्रमंडल के तत्वावधान में वृक्ष रक्षाबंधन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम नाला वन प्रक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सात गांवों—पिटवासोल, कालीपहाड़ी, बड़ारामपुर, एकलव्यपुर, बालीचूड़, पियालसोला और भंडारकोल के जंगलों में आयोजित हुआ। यहां ग्रामीणों, महिलाओं और स्कूली बच्चों ने सखुआ के विशाल पेड़ों की विधिवत पूजा-अर्चना की और उन्हें रक्षा सूत्र बांधा।
पेड़ों को राखी बांधने के बाद मौजूद लोगों ने जंगल और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान छोटे-छोटे बच्चों द्वारा पेड़ों की कलाई पर राखी बांधने का दृश्य खास आकर्षण का केंद्र रहा। बच्चों ने संकल्प लिया कि वे पेड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे और अपने आसपास के लोगों को भी जंगल बचाने के लिए प्रेरित करेंगे।
ग्रामीणों ने कहा कि पेड़ केवल जंगल का हिस्सा नहीं, बल्कि हमारे जीवन के रक्षक हैं। पेड़ों से हमें ऑक्सीजन, फल, छाया और पर्यावरण का संतुलन मिलता है। ऐसे में उनकी रक्षा करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
मौके पर प्रधान वनरक्षी पुलक कुमार माल ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस तरह बहन अपने भाई की लंबी उम्र और सुरक्षा के लिए राखी बांधती है, उसी भावना के साथ हमें जंगल और पर्यावरण की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए। पेड़ों की सुरक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में होमगार्ड बापी दास, कंप्यूटर ऑपरेटर राजकुमार दास, वाहन चालक रोबिन दास के अलावा वरुण मंडल, उत्तम कुमार, सीमंत कुमार, काजल कुमार, विभीषण कुमार, भागवत कुमार, वैद्यनाथ कुमार, परिमल कुमार सहित सैकड़ों ग्रामीण और बच्चे मौजूद रहे।
रक्षाबंधन के इस अनोखे आयोजन ने भाई-बहन के रिश्ते के साथ-साथ मानव और प्रकृति के रिश्ते को भी मजबूत करने का संदेश दिया।
जामताड़ा से संतोष कुमार की रिपोर्ट






