धनबाद सोशल मीडिया की ताकत का एक उदाहरण धनबाद में देखने को मिला, जहां एक बच्ची पर आवारा कुत्तों के हमले का वीडियो वायरल होने के बाद नगर निगम हरकत में आया। वीडियो में दर्जनों की संख्या में आवारा कुत्ते एक बच्ची को घेरकर हमला करते नजर आ रहे थे। इस मामले की खबर ‘अपना बिहार झारखंड’ चैनल पर भी प्रमुखता से प्रसारित की गई थी। खबर सामने आने के बाद मामले को सोशल मीडिया पर भी प्रमुखता से उठाया गया, जिसके बाद धनबाद नगर निगम के अधिकारियों ने आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए अभियान शुरू किया।
नगर निगम की टीम ने इलाके में घूम रहे आवारा कुत्तों को पकड़ने की कार्रवाई शुरू की। अभियान के दौरान निगम कर्मियों ने लोगों से सहयोग की अपील भी की। निगम कर्मियों का कहना है कि आवारा कुत्तों को पकड़ने के दौरान कई बार स्थानीय लोगों का अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाता है। कर्मियों के मुताबिक, वे जब कुत्तों को पकड़ते हैं तो कुछ लोग उन्हें छुड़ा देते हैं, जिससे अभियान प्रभावित होता है।
इस पूरे मामले ने एक अहम सवाल भी खड़ा किया है कि क्या शहर को सुरक्षित और स्वच्छ बनाने की जिम्मेदारी केवल नगर निगम और सरकारी अधिकारियों की है? क्या आम नागरिकों की भी इसमें कोई भूमिका नहीं है? शहर की साफ-सफाई, सुरक्षा और बेहतर माहौल के लिए प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।
आवारा कुत्तों की समस्या केवल एक इलाके तक सीमित नहीं है। कई जगहों पर इनके झुंड राहगीरों और बच्चों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। ऐसे में प्रशासन को जहां व्यवस्थित और मानवीय तरीके से अभियान चलाने की जरूरत है, वहीं लोगों को भी अभियान में सहयोग करना चाहिए।
धनबाद नगर निगम की कार्रवाई के बाद अब जरूरत है कि यह अभियान केवल कुछ दिनों तक सीमित न रहे, बल्कि आवारा पशुओं और कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में लगातार काम हो।
साथ ही, नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। स्वच्छ, सुरक्षित और बेहतर समाज केवल सरकारी संस्थाओं के भरोसे नहीं बनाया जा सकता। निगम और प्रशासन जनता की सेवा के लिए हैं, लेकिन शहर को साफ, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की पहली जिम्मेदारी समाज के हर नागरिक की भी है।






