पश्चिमी चंपारण में भारत-नेपाल सीमा से सटे सुस्ता क्षेत्र में गंडक नदी के कटान का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। नेपाल की ओर तटबंध के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के बाद नदी की धारा भारतीय क्षेत्र की ओर मुड़ने की आशंका जताई गई है। तेज कटाव को लेकर सशस्त्र सीमा बल यानी SSB के महानिदेशक संजय सिंघल ने बिहार के मुख्य सचिव और प्रमंडलीय आयुक्त को पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। SSB महानिदेशक के पत्र के अनुसार, दो अगस्त को नेपाल के सुस्ता गांव के कुछ लोगों ने कथित तौर पर असामाजिक तत्वों की मदद से यथास्थिति रेखा का उल्लंघन करते हुए तटबंध के विस्तार का प्रयास किया था। जबकि पहले सहमति बनी थी कि यथास्थिति रेखा का उल्लंघन नहीं किया जाएगा और उसके समीप तटबंध निर्माण भी नहीं होगा। सूचना मिलने के बाद स्थिति को दोबारा सामान्य किया गया।
SSB महानिदेशक के पत्र के अनुसार, दो अगस्त को नेपाल के सुस्ता गांव के कुछ लोगों ने कथित तौर पर असामाजिक तत्वों की मदद से यथास्थिति रेखा का उल्लंघन करते हुए तटबंध के विस्तार का प्रयास किया था। जबकि पहले सहमति बनी थी कि यथास्थिति रेखा का उल्लंघन नहीं किया जाएगा और उसके समीप तटबंध निर्माण भी नहीं होगा। सूचना मिलने के बाद स्थिति को दोबारा सामान्य किया गया।
12 अगस्त को तेज जलधारा के कारण गंडक नदी के प्रवाह मार्ग में बदलाव की जानकारी सामने आई। इसके बाद धनैयारेता और भारतीय क्षेत्र में भारी कटान शुरू हो गया। कटान की वजह से यथास्थिति रेखा पर स्थित महत्वपूर्ण पहचान बिंदु पाकड़ का पेड़ भी नदी में समा गया है। अब कटान सेमल के पेड़ की ओर बढ़ रहा है।
SSB ने आशंका जताई है कि अगर नदी की वर्तमान धारा आगे चलकर मुख्य धारा में बदलती है, तो वर्ष 2005 से अनुरक्षित यथास्थिति रेखा और सुस्ता से सटे भारतीय क्षेत्र के जलमग्न होने का खतरा बढ़ सकता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने पश्चिमी चंपारण के जिलाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया है। आठ सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आपात बैठक भी बुलाई गई है। SSB ने कटान रोकने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित कर तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है।
इसके साथ ही सुस्ता क्षेत्र में चकदावा, रामपुरवा और झेंडूटोला सीमा चौकियों से यथास्थिति रेखा तक बारहमासी सड़क बनाने तथा चकदावा से हरिद्वार पुल और हरिद्वार पुल से झेंडूटोला गांव तक सड़क निर्माण का आग्रह किया गया है। अब प्रशासन के सामने सीमा सुरक्षा के साथ भारतीय क्षेत्र को कटान से बचाने की बड़ी चुनौती है।






