दरभंगा से मानवता और प्रेरणा की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि इंसान अपने कर्मों से ही अमर होता है। मिर्जापुर निवासी 70 वर्षीय उद्योगपति स्वर्गीय ओम प्रकाश सराफ ने मृत्यु के बाद भी दो लोगों के जीवन में उजाला भर दिया। उनके परिवार ने उनके निधन के बाद नेत्रदान का निर्णय लेकर समाज को एक मजबूत और सकारात्मक संदेश दिया है।

सोमवार को ओम प्रकाश सराफ के निधन के बाद उनके परिजनों ने दधीचि देहदान समिति की पहल पर यह सराहनीय कदम उठाया। इस निर्णय के तहत उनके नेत्र दान किए गए, जिससे दो नेत्रहीन व्यक्तियों को नई रोशनी मिल सकेगी। यह कार्य न केवल संवेदनशीलता का परिचायक है, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी बन गया है।

नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया दरभंगा मेडिकल कॉलेज (DMCH) के नेत्र बैंक की टीम द्वारा पूरी तत्परता और सावधानी के साथ संपन्न की गई। इस दौरान डॉ. रश्मि कुमारी, डॉ. रजनीश कुमार, डॉ. प्रतीक प्रभाकर, सिस्टर पूनम कुमारी और सिस्टर चांदनी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी ने मिलकर इस पुनीत कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

मंगलवार को शुभंकरपुर स्थित श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार सनातन परंपरा के अनुसार किया गया। इस दौरान परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और समाज के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके इस महान कार्य की सराहना की।

ओम प्रकाश सराफ अपने पीछे एक समृद्ध परिवार छोड़ गए हैं। वह आठ भाइयों में पांचवें स्थान पर थे और उन्होंने श्री बालाजी इंडस्ट्रीज, श्री खाटू श्याम इंडस्ट्रीज और एस.एस. इंडस्ट्रीज के माध्यम से सैकड़ों लोगों को रोजगार देकर समाज में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

दधीचि देहदान समिति के क्षेत्रीय मंत्री मनमोहन सरावगी ने परिवार के इस साहसिक निर्णय के लिए आभार व्यक्त किया और समाज के अन्य लोगों से भी नेत्रदान के लिए आगे आने की अपील की। यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि मृत्यु के बाद भी जीवन को रोशन किया जा सकता है।

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