नालंदा: बिहार के नालंदा जिले में चार साल पुराने मासूम हत्याकांड में बिहार शरीफ की निचली अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. आपसी रंजिश में आठ वर्षीय बच्चे की हत्या करने के दोषी नियोजित शिक्षक मो. फिरोज आलम को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. इसके साथ ही आरोपी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. जुर्माना नहीं देने पर उसे छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा.
यह फैसला बुधवार को बिहार शरीफ व्यवहार न्यायालय के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-11 मनीष कुमार ने त्वरित सुनवाई के दौरान सुनाया. अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक महेश सिंह यादव और सूचक के अधिवक्ता दीपक कुमार रस्तोगी ने मामले को गंभीर अपराध बताते हुए आरोपी को कठोरतम सजा देने की मांग की थी.
दोषी ठहराया गया मो. फिरोज आलम सिलाव थाना क्षेत्र के हैदरगंज कड़ाह गांव का रहने वाला है. वह वर्ष 2016 से कतरीसराय प्रखंड के मध्य विद्यालय वादी में नियोजित शिक्षक के रूप में कार्यरत था. अदालत ने मामले में पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर उसे दोषी पाया.
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल सात गवाहों की गवाही कराई गई. गवाहों के बयान और पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों ने आरोपी के खिलाफ अभियोजन के मामले को मजबूत किया.
दरअसल, 12 जुलाई 2023 की सुबह करीब आठ बजे सिलाव थाना क्षेत्र के कड़ाह हैदरगंज गांव निवासी मो. सिराज का आठ वर्षीय बेटा मो. सफीक गली में खेल रहा था. इसी दौरान आरोपी वहां पहुंचा और बच्चे को पकड़ लिया. आरोप है कि इसके बाद चाकू से हमला कर उसकी हत्या कर दी गई. घटना के पीछे आपसी रंजिश की बात सामने आई थी.
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और घटनास्थल से खून लगा चाकू बरामद किया था. पुलिस की जांच, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने अब आरोपी शिक्षक को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है.






