बिहार कृषि विश्वविद्यालय में गाजर घास जागरूकता सप्ताह, विद्यार्थियों ने चलाया उन्मूलन अभियान

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में 16 से 22 अगस्त 2026 तक गाजर घास जागरूकता सप्ताह-2026 का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य गाजर घास के दुष्प्रभावों के प्रति विद्यार्थियों, किसानों और आम लोगों को जागरूक करना तथा इसके प्रभावी प्रबंधन और उन्मूलन के लिए वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक उपायों को बढ़ावा देना है।

 

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कार्यक्रम का आयोजन बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर के सस्य विज्ञान विभाग और कृषि व्यवसाय प्रबंधन महाविद्यालय, सबौर द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। इसमें बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर और बिहार कृषि महाविद्यालय की एनएसएस इकाई का भी सहयोग मिल रहा है। कार्यक्रम में डॉ. संजय कुमार, अधिष्ठाता (स्नातकोत्तर), बिहार कृषि विश्वविद्यालय तथा डॉ. एम.के. वाधवानी, प्राचार्य, कृषि व्यवसाय प्रबंधन महाविद्यालय की उपस्थिति रही।

 

जागरूकता सप्ताह की शुरुआत 18 अगस्त को विश्वविद्यालय परिसर में गाजर घास उन्मूलन अभियान से हुई। एनएसएस स्वयंसेवकों, दोनों महाविद्यालयों के स्नातक विद्यार्थियों और सस्य विज्ञान विभाग के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने अभियान में सक्रिय भागीदारी की। विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय परिसर के अलग-अलग हिस्सों से गाजर घास को उखाड़कर हटाया और परिसर को इससे मुक्त करने का प्रयास किया। इसके बाद जागरूकता एवं शैक्षणिक व्याख्यान के माध्यम से गाजर घास के दुष्प्रभाव और इसके प्रबंधन की जानकारी दी गई।

 

19 अगस्त को विश्वविद्यालय के अनुसंधान प्रक्षेत्र में भी उन्मूलन अभियान चलाया गया। विद्यार्थियों और एनएसएस स्वयंसेवकों ने गाजर घास हटाकर इसके प्रसार को रोकने का सामूहिक प्रयास किया।

 

कार्यक्रम के तहत 20 अगस्त को ‘गाजर घास उन्मूलन में पारिस्थितिक बाधाएं एवं भविष्य की कार्ययोजना’ विषय पर विचार-मंथन सत्र होगा। 21 अगस्त को मानव स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके खतरों को लेकर व्याख्यान आयोजित किया जाएगा। 22 अगस्त को वैज्ञानिक-विद्यार्थी-किसान संवाद के साथ सप्ताह का समापन होगा।

 

अंतिम चरण में विद्यार्थियों के लिए सरप्राइज क्विज प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम के माध्यम से गाजर घास के कृषि, जैव विविधता, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

 

 

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