दहेज में भैंस नहीं मिलने के विवाद में पत्नी रीना की हत्या करने के मामले में अदालत ने उसके पति सुभाष यादव को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। बगहा के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-4 मानवेंद्र मिश्रा की अदालत ने 18 अगस्त को मामले की सुनवाई करते हुए सुभाष यादव को हत्या का दोषी माना।
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत सुभाष यादव को आजीवन कारावास के साथ एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माने की राशि नहीं देने पर छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। वहीं, साक्ष्य मिटाने के मामले में धारा 201 के तहत सात साल की कैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। इस जुर्माने को नहीं देने पर भी छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
दहेज में भैंस नहीं मिलने पर बढ़ा विवाद
मामले में सामने आया कि दहेज में भैंस नहीं मिलने की बात को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद चल रहा था। इसी विवाद के बाद सुभाष यादव पर अपनी पत्नी रीना की हत्या करने का आरोप लगा। हत्या के बाद सबूत मिटाने की कोशिश भी की गई। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सुभाष यादव को दोषी माना और कड़ी सजा सुनाई।
मां की हत्या, पिता को उम्रकैद… बच्चों का क्या होगा?
अदालत ने सजा सुनाते समय मृतका रीना के दोनों नाबालिग बच्चों के भविष्य को भी ध्यान में रखा। मां की हत्या हो चुकी है और पिता को उम्रकैद की सजा मिलने के बाद दोनों बच्चों की परवरिश का संकट खड़ा हो गया है।
इसी को देखते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि परवरिश योजना के तहत दोनों बच्चों को हर महीने 4-4 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। साथ ही दोनों बच्चों को डीएलसी पुनर्वास योजना का लाभ देने का भी आदेश दिया गया है।
अदालत के इस फैसले से जहां पत्नी की हत्या के दोषी पति को उम्रकैद की सजा मिली है, वहीं बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकारी सहायता का रास्ता भी साफ हुआ है।






