मोतिहारी के रक्सौल थाना क्षेत्र में पुलिस ने नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. गुप्त सूचना के आधार पर महदेवा गांव के पास आंध्र प्रदेश नंबर की एक संदिग्ध कार को रोककर तलाशी ली गई, जिसमें करीब 12 हजार नशीले इंजेक्शन बरामद हुए. इन इंजेक्शनों में नर्फिन, फेनारगन और डाइजापाम जैसी दवाएं शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल नशे के लिए किया जाता है.
पुलिस को पहले ही सूचना मिल चुकी थी कि आंध्र प्रदेश से भारी मात्रा में नशीली दवाएं नेपाल भेजी जा रही हैं. इसी सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए रक्सौल थाना पुलिस ने इलाके में घेराबंदी की और संदिग्ध वाहन को पकड़ लिया. इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व थानाध्यक्ष सह प्रशिक्षु आईपीएस हेमंत सिंह ने किया.
मामले में दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी पहचान वकील महतो (जिला बारा, नेपाल) और पूरन ठाकुर (जिला परसा, नेपाल) के रूप में हुई है. पुलिस पूछताछ में दोनों ने कबूल किया कि वे लंबे समय से भारत-नेपाल सीमा का फायदा उठाकर नशीली दवाओं की तस्करी कर रहे थे.
जांच में यह भी सामने आया है कि यह एक संगठित नेटवर्क है, जो आंध्र प्रदेश से दवाएं मंगवाकर नेपाल पहुंचाता था. सीमावर्ती इलाकों में इस तरह का अवैध कारोबार लंबे समय से चल रहा था. पुलिस टीम में एसपीओ मनीष आनंद और एसआई विकास कुमार की अहम भूमिका रही.
बरामद दवाएं युवाओं के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती हैं. नर्फिन का दुरुपयोग नशे के रूप में किया जाता है, जबकि फेनारगन और डाइजापाम जल्दी लत लगा देती हैं. पुलिस का कहना है कि इससे युवाओं में नशे की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है.
पुलिस अब स्थानीय दवा दुकानों की भूमिका की भी जांच कर रही है. आशंका है कि कुछ दुकानदार इस अवैध सप्लाई चेन में शामिल हो सकते हैं. फिलहाल, दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई जारी है.
