बिहार के गया शहर में नल से आने वाला पानी लोगों के लिए राहत नहीं, बल्कि परेशानी और बीमारी की वजह बन चुका है। वार्ड नंबर 38 के करीब 30 हजार से ज्यादा लोग पिछले दो वर्षों से दूषित और बदबूदार पानी की समस्या झेल रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि यह पानी न पीने योग्य है और न ही नहाने के लायक।

स्थानीय लोगों के मुताबिक नल से निकलने वाला पानी पीले रंग का, तेल जैसा चिपचिपा और तेज बदबू वाला होता है। कई घरों में बर्तन तक काले पड़ जाते हैं। मजबूरी में लोग दूसरे इलाकों से पानी खरीदकर ला रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक परेशानी भी बढ़ गई है।

लालो गली, आटा मिल समेत कई मोहल्लों में स्थिति बेहद खराब है। लोगों का आरोप है कि शहर के नालों का गंदा पानी मोटर के जरिए टंकी में पहुंच रहा है और वहीं से घरों तक सप्लाई हो रहा है। इस कारण बच्चे, बुजुर्ग और युवा लगातार बीमार पड़ रहे हैं।

स्थानीय निवासी शांति देवी बताती हैं कि पानी इतना खराब है कि इस्तेमाल करना भी मुश्किल हो जाता है। वहीं कांति देवी कहती हैं कि उन्हें पीने के लिए साफ पानी लाने कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। सुंदर सिंह का कहना है कि गंदा पानी पीने से उनकी तबीयत कई बार बिगड़ चुकी है।

लोगों का यह भी आरोप है कि ‘हर घर गंगाजल’ योजना के तहत पाइपलाइन तो बिछाई गई, लेकिन अब तक कनेक्शन नहीं दिया गया। नगर निगम और बुडको में कई बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मामला अब लोक शिकायत निवारण केंद्र तक पहुंचा, लेकिन वहां भी सिर्फ तारीख मिल रही है।

डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह का दूषित पानी पीना बेहद खतरनाक है, जिससे लीवर, आंत, त्वचा और आंखों से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं।

नगर आयुक्त अभिषेक पलासिया ने कहा है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था, लेकिन अब जांच कर जल्द कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल बड़ा सवाल यही है—दो साल से परेशान लोगों को साफ पानी कब मिलेगा?

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