पटना: बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के बाद हलचल और तेज हो गई है। पांचों सीटों पर एनडीए की जीत के बाद अब नजर आने वाले विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव पर है, जहां विपक्ष में टूट की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। मुख्यमंत्री के बयान और सत्ताधारी दल के दावों से यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
विधान परिषद की कई सीटें खाली होने वाली हैं और अगले महीने एक दर्जन सीटों पर चुनाव प्रस्तावित है। वर्तमान संख्या बल के आधार पर एनडीए को बढ़त मिलती दिख रही है, जबकि विपक्ष के लिए चुनौती बढ़ सकती है। बीजेपी और जेडीयू नेताओं का दावा है कि विपक्षी विधायकों में असंतोष है और कई विधायक संपर्क में हैं।
जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन का कहना है कि विपक्ष में टूट स्वाभाविक है और इसके लिए किसी विशेष प्रयास की जरूरत नहीं है। वहीं बीजेपी प्रवक्ता सुमित सुशांत ने आरोप लगाया कि आरजेडी के विधायक के नेतृत्व से असंतुष्ट हैं और पाला बदल सकते हैं।
दूसरी तरफ आरजेडी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि विधायकों को खरीदने की कोशिश हो रही है, लेकिन पार्टी मजबूत है और एमएलसी चुनाव में जीत का दावा किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर विपक्ष में टूट होती है, तो इसका असर विधानसभा की स्थिति पर भी पड़ सकता है। आरजेडी के पास 25 विधायक हैं और यदि संख्या और घटती है, तो का नेता प्रतिपक्ष पद भी खतरे में आ सकता है। हालांकि अंतिम फैसला विधानसभा अध्यक्ष के विवेक पर निर्भर करेगा।
गौरतलब है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान कुछ विधायकों के मतदान में हिस्सा नहीं लेने से विपक्ष को नुकसान हुआ था। ऐसे में अब मई का महीना बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, जहां मंत्रिमंडल विस्तार और एमएलसी चुनाव दोनों मिलकर बड़ा सियासी बदलाव ला सकते हैं।
