पटना: ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2026’ भले ही लोकसभा में पास नहीं हो पाया हो, लेकिन इसे लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी और एनडीए अब इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने की रणनीति बना रहे हैं। इसी कड़ी में रविवार को पटना में एनडीए नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। इस दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी मौजूद रहे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2005 में बिहार में एनडीए सरकार बनने के बाद पंचायती राज और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था। आज स्थिति यह है कि 50 प्रतिशत आरक्षण के बावजूद राज्य में 59 प्रतिशत से अधिक महिलाएं चुनाव जीतकर प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
सीएम ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह ने भरोसा दिया था कि इस विधेयक के जरिए लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 और आगे 850 तक की जाएगी। अगर यह बिल पास हो जाता, तो 816 सांसदों में से 272 महिलाएं होतीं और बिहार विधानसभा में महिला विधायकों की संख्या 29 से बढ़कर कम से कम 122 हो जाती। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने अपनी राजनीतिक स्वार्थ के कारण इस ऐतिहासिक बिल को पास नहीं होने दिया और कहा कि “आधी आबादी इसका जवाब जरूर देगी।”
वहीं, जेडीयू विधायक और पूर्व मंत्री लेसी सिंह ने कहा कि लोकतंत्र के इतिहास में यह पहली बार है जब कुछ दल इस तरह के विधेयक पर खुशियां मना रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले भी ऐसे प्रयासों का विरोध किया जाता रहा है।
अनामिका पटेल ने भी विपक्ष पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि बड़े राजनीतिक घरानों की महिलाएं चुनाव जीत सकती हैं, लेकिन आम परिवारों की महिलाओं को आगे बढ़ाने में विपक्ष की कोई रुचि नहीं है।
