पटना रंगमंच के वरिष्ठ अभिनेता और निर्देशक सुरेश कुमार हज्जू को अभिनय के क्षेत्र में दशकों लंबे योगदान के लिए प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित विशेष समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया। पुरस्कार के तहत उन्हें ताम्रपत्र, प्रशस्ति पत्र और एक लाख रुपये की राशि दी गई।
वर्ष 2024 और 2025 के लिए देशभर के कलाकारों को दिए गए इस सम्मान में बिहार के तीन कलाकार शामिल हैं। इनमें सुरेश हज्जू के अलावा मैथिली रंगमंच के वरिष्ठ रंगकर्मी शिव नारायण झा ‘कुणाल’ और लोक वाद्य कलाकार महेंद्र राम भी शामिल हैं।
सुरेश हज्जू ने करीब चार दशकों के अपने रंगमंचीय सफर में अभिनेता और निर्देशक दोनों रूपों में पटना के रंगमंच को समृद्ध किया है। वह विशाल नाट्य मंच, निर्माण कला मंच और एचएमटी, पटना जैसे रंग समूहों से जुड़े रहे हैं और इनके गठन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अभिनय के साथ उन्होंने निर्देशन और नई पीढ़ी के कलाकारों को तैयार करने का काम भी लगातार किया।
‘बिदेसिया’ में बटोही और ‘बकरी’ में दुर्जन सिंह जैसे उनके किरदार काफी चर्चित रहे हैं। हालांकि, महात्मा गांधी का किरदार उनकी सबसे खास पहचान बना। गांधी की भूमिका को उन्होंने मंच पर इस तरह जीवंत किया कि उन्हें अलग पहचान मिली। यही भूमिका राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की नजर में भी उनकी पहचान बनी।
समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने मुस्कुराते हुए बताया कि उन्होंने सुरेश हज्जू के अभिनय का वीडियो देखा है। यह पल उनके लिए बेहद यादगार रहा।
सम्मान मिलने के बाद हज्जू ने कहा कि यह पुरस्कार वर्षों की मेहनत का सम्मान है और इससे कला के प्रति उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। उन्होंने नई पीढ़ी के कलाकारों से ईमानदारी और निरंतर अभ्यास के साथ मंचीय प्रस्तुति करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारतीयता और अपनी सांस्कृतिक जड़ों की रक्षा करना कलाकारों की जिम्मेदारी है।
वरिष्ठ रंगकर्मी अनीश अंकुर ने कहा कि यह सम्मान सिर्फ सुरेश हज्जू की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि बिहार के रंगमंच की दशकों पुरानी परंपरा को मिली राष्ट्रीय पहचान है। बिहार के रंगकर्मियों ने इस उपलब्धि पर गर्व जताया है।





