
साल 2009 में आई अमिताभ बच्चन की चर्चित फिल्म ‘पा’ में जिस दुर्लभ बीमारी प्रोजेरिया को पर्दे पर दिखाया गया था, उसी बीमारी से जूझ रहे बेल्जियम के लोकप्रिय कंटेंट क्रिएटर और गेमर मिचील वांडेवीर्ट का 28 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद उनकी जिंदगी और संघर्ष की कहानी एक बार फिर दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गई है।
मिचील को बचपन से ही प्रोजेरिया नाम की बेहद दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी थी। इस बीमारी में शरीर में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया सामान्य से कहीं ज्यादा तेजी से होती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डॉक्टरों ने उनके परिवार को बताया था कि मिचील शायद 12 साल की उम्र से आगे नहीं जी पाएंगे। लेकिन उन्होंने डॉक्टरों की उस आशंका को पीछे छोड़ते हुए 28 साल तक जिंदगी का सफर तय किया।
फिल्म ‘पा’ में अमिताभ बच्चन ने प्रोजेरिया से पीड़ित ऑरो का किरदार निभाया था। फिल्म के जरिए इस दुर्लभ बीमारी को देशभर के लोगों ने करीब से समझा था। अब मिचील की कहानी ने एक बार फिर प्रोजेरिया जैसी बीमारी और उससे जूझने वाले लोगों की जिंदगी की ओर दुनिया का ध्यान खींचा है।
मिचील ने बीमारी को अपनी पहचान बनने नहीं दिया। उन्होंने गेमिंग और सोशल मीडिया को अपनी ताकत बनाया। ऑनलाइन कंटेंट, स्ट्रीमिंग और अपनी जिंदगी के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ा। मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद उनका सकारात्मक अंदाज और मुस्कुराते हुए जिंदगी जीने का तरीका लोगों को बेहद पसंद आया।
मिचील फुटबॉल क्लब केआरसी जेनक के बड़े प्रशंसक थे। उनकी आखिरी इच्छा थी कि निधन के बाद उन्हें उनके पसंदीदा क्लब के स्टेडियम में अंतिम विदाई दी जाए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी यह इच्छा पूरी की गई और क्लब के मैदान पर उनकी अंतिम विदाई हुई।
मिचील की कहानी बेल्जियम से निकलकर भारत, अमेरिका, इटली, मैक्सिको समेत कई देशों तक पहुंची। उनका जीवन यह संदेश देता है कि जिंदगी की लंबाई हमारे हाथ में नहीं होती, लेकिन मुश्किल परिस्थितियों के बीच जिंदगी को किस हौसले और सकारात्मकता के साथ जीना है, यह हमारे हाथ में जरूर होता है।





